उझानी (बदायूं)। पुलवामा आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ के जवानों की शहादत के बाद रविवार को कछला में बाजार बंदी के दौरान एक मकान की छत पर लगे मिले झंडे का फाड़ दिए जाने के मामले में पुलिस ने अंतत: निरोधात्मक कार्रवाई कर दी। शुरू से ही झंडे को धर्म विशेष का करार दे चुकी पुलिस को प्रदर्शनकारियों के पास झंडा तो नहीं मिला लेकिन दोनों पक्ष के लोगों से शांति भंग होने का खतरा बताया गया। दोनों पक्षों के 22 लोगों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई है।
कछला में बाजार बंदी के दौरान झंडा फाड़ जाने को लेकर जलालुद्दीन ने कुछ लोगों के खिलाफ चौकी इंचार्ज राकेश कुमार वर्मा से शिकायत की। आरोप है कि युवकों ने उसके मकान की छत से जो झड़ा फाड़ा, उसका पाकिस्तान से कोई ताल्लुक नहीं था। हर हरे झंडे को पाकिस्तान का नहीं ठहराया जा सकता। जलालुद्दीन ने युवकों पर अभद्रता करने का भी आरोप लगाया था। बता दें कि रविवार पूर्वाह्न में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद युवकों की टोली ने झंडा फाड़ दिया था। मौके पर उनकी गृहस्वामी से नोकझोंक भी हुई थी लेकिन आसपास के लोगों ने तनाव की आशंका के चलते दोनों पक्षों के युवकों को शांत कर दिया था।
चौकी इंचार्ज ने बताया कि झंडे को लेकर कुछ लोगों ने बेवजह तूल देने की कोशिश की थी। यह बात दोनों पक्ष के अमनपसंद लोग अच्छी तरह जानते हैं। दोनों पक्षों के 22 लोगों को खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई कर दी गई है। कार्रवाई की चपेट में आए दो युवक भाजपा से जुड़े बताए गए हैं। उधर, सोमवार को कछला चौकी के पुलिस कर्मियों की पूरे घटनाक्रम पर नजर रही। दोनों पक्षों के लोगों को शांति बनाए रखने की हिदायत दी गई। पुलिस जिस झंडे का धर्म विशेष का बता रही है, वह कहां है, यह पुलिस को ही नहीं पता है। चौकी इंचार्ज ने कहा कि किसी ने भी माहौल खराब करने की कोशिश की तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।