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दुर्घटना के बाद उझानी अस्पताल में बवाल
सीएचसी के डॉक्टर और घायलों के तीमारदारों में मारपीट, तोड़फोड़ मौके पर पहुंची पुलिस, घायलों को जिला अस्पताल भेजा, एक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं/ उझानी। कछला-मुजरिया रोड पर हुए सड़क हादसे के बाद उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जमकर बवाल हुआ। इलाज को लेकर ग्रामीणों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर के बीच कहासुनी के बाद जमकर मारपीट हुई और तोड़फोड़ की गई। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराने के बाद घायलों को जिला अस्पताल रेफर करा दिया। जहां हादसे में घायल एक युवक की मौत हो गई।
यह हादसा रविवार रात करीब 10 बजे कछला-मुजरिया रोड पर गांव धर्मपुर के पास हुआ। मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव वितरोई निवासी रामसिंह का 28 वर्षीय पुत्र विनीत दिल्ली में नौकरी करता था। रामसिंह उसे बस में बैठाने के लिए बाइक पर मुजरिया को चला। उसके साथ गांव का श्यामवीर भी था। रास्ते में उनकी बाइक रोड किनारे खड़ी बालू भरी ट्रॉली से टकरा गई। इसमें विनीत के सबसे ज्यादा चोट लगी। श्यामवीर ने कॉल करके हादसे की जानकारी अपने गांव के लोगों को दी तो कई लोग मौके पर जा पहुंचे। घायलों को फौरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उझानी ले जाया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि वहां इमरजेंसी में फार्मेसिस्ट और वार्ड ब्वाय थे। फार्मेसिस्ट ने चिकित्सक मतलूब रहमान को फोन किया। इमरजेंसी में डॉक्टर के मौजूद न होने पर तीमारदारों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच डॉ. रहमान इमरजेंसी पहुंच गए। उनके समझाने पर लोग नहीं माने तो कहासुनी होने लगी। हंगामा बढ़ने पर दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हो गई। कुछ लोगों ने कुर्सियां उठाकर फेंकना शुरू कर दिया। खिड़की का शीशा तोड़ डाला। अस्पताल में हंगामा होने का पता लगने पर पुलिस अस्पताल पहुंच गई। पुलिस ने तीमारदारों को शांत करने के बाद घायलों को जिला अस्पताल भिजवा दिया। जहां देर रात इलाज के दौरान हादसे में घायल विनीत की मौत हो गई।
उधर, सोमवार सुबह चिकित्सक मतलूब रहमान ने हाथापाई और तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए कोतवाली जाकर तहरीर भी दे दी। सोमवार सुबह पुलिस ने दोबारा जाकर मौका मुआयना किया। कोतवाल विनोद कुमार चाहर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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कुछ तो है जो भड़क जाते हैं तीमारदार
उझानी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर घायलों के इलाज को लेकर हंगामे का यह पहला मामला नहीं है। पिछले महीना रक्तस्राव से पीड़ित महिला के इलाज को लेकर डॉक्टर और भाकियू कार्यकर्ताओं में जमकर नोकझोंक हुई थी। एक डॉक्टर ने उस समय भी कोतवाली जाकर पुलिस को तहरीर सौंप दी। इसकी भनक लगते ही भाकियू कार्यकर्ताओं ने जब कोतवाली पहुंचकर अपना पक्ष रखा तो मामला शांत हुआ। दो बार पहले भी मरीज इलाज में उदासीनता का आरोप लगाकर शिकायतें कर चुके हैं।
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वर्जन
डॉ. एम रहमान के साथ घायलों के तीमारदारों ने अच्छा व्यवहार नहीं किया। तोड़फोड़ भी की गई थी। रात में पुलिस हस्तक्षेप नहीं करती तो लोग शांत नहीं होते। पुलिस को पूरे घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. महेश प्रताप सिंह, चिकित्साधिकारी