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भूमाफिया के कब्जे से छुड़ाई 588 बीघा जमीन

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मौके पर मौजूद अफसर। - फोटो : अमर उजाला
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कादरचौक (बदायूं)। भूमाफिया से सरकारी और गरीबों के पट्टे की जमीन को मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में कई अधिकारियों और पांच थानों की पुलिस ने 13 ट्रैक्टर लगाकर दबंगों की फसल पलटवा दी। अब असली मालिकों को जमीन देने की कवायद शुरू की जाएगी।
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कादरचौक ब्लॉक के गंगा किनारे गांव मुगर्रा टटेई की ग्राम समाज की जमीन पर कई साल से भूमाफिया का कब्जा है। सपा सरकार में दबंगों ने ग्राम समाज की भूमि के साथ ही गरीबों की जमीन भी कब्जा ली थी। शिकायतों पर जांच के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया। एडीएम प्रशासन अजय श्रीवास्तव, एसडीएम पारसनाथ मौर्य ने कादरचौक समेत आसपास के पांच थानों की पुलिस को साथ लिया और 588 बीघा जमीन पर खड़ी गेहूं और सरसों की फसल को नष्ट करा दिया। गंगा की तलहटी में भरी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की दस्तक से आसपास के गांव के लोग भी यहां एकजुट हो गए। हालांकि इस दौरान कोई भूमाफिया आसपास नहीं फटका। एडीएम ने एसडीएम और नायब तहसीलदार दीपक कुमार चौधरी के नेतृत्व में टीम बनाकर पट्टा आवंटन के लिए पात्रों को चिह्नित करने का काम सौंपा। कहा कि जरूरतमंद लोगों को ही भूमि आवंटित की जाए। इस अवसर पर सभी कानूनगो, लेखपाल मौजूद रहे। पांच थानों की पुलिस के साथ ही महिला थाना की एसओ और पीएसी भी रही। जमीन कब्जा मुक्त कराकर प्रधान को संरक्षण की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
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पहले तहसीलदार ने चलाया ट्रैक्टर
कादरचौक। भूमाफिया पर कार्रवाई से पहले तहसीलदार राजेंद्र चौधरी ने 19 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इनमें बड़े भूमाफिया के तौर पर खेड़ा जलालपुर उसहैत निवासी नन्हे उर्फ गौतम व कादरचौक के खुड़वारा निवासी सुखलाल शामिल थे। मंगलवार को अधिकारी कार्रवाई करने पहुंचे तो दबंगों के डर से आसपास के गांवों के लोग अपने ट्रैक्टर नहीं दे रहे थे। तब तहसीलदार से दूरदराज के गांव से ट्रैक्टर मंगाए। पहले खुद उन्होंने ट्रैक्टर चलाकर फसल पलटी। इसके बाद तो ट्रैक्टर चालक जोश में आ गए और खुद फसल को नष्ट करने लगे।
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जोरीनगला के किसान भी पहुंचे फरियाद लेकर
कादरचौक। जोरीनगला के कुंवरपाल ने एसडीएम से फरियाद की कि जोरीनगला के 70 अनुसूचित जाति के किसानों की 900 बीघा जमीन भी दबंगों के कब्जे में है। काफी कोशिश से मात्र 90 बीघा जमीन पर कब्जा मिला है। लेखपाल की भूमिका भी ठीक नही है। अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया।
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गंगा मे समाए ढकनगला जमीन जोत रहे दबंग
कादरचौक। रजिस्ट्रार कानूनगो ने बताया कि जिस तमीन को खाली कराया गया है वहां कभी ढकनगला गांव बसा करता था। गंगा ने गांव काट दिया तो कई लोग म्याऊ के पास ढका में बस गए। कुछ लोग अन्य जगहों पर चले गए। हालांकि उनकी जमीन अभी यहीं है। इसी जमीन पर भूमाफिया ने कब्जा कर रखा है। कागजातों में भी हेराफेरी की गई है। इस कार्रवाई से दबंगों के हौसले पस्त होंगे।
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कासगंज प्रशासन की टीम ने जताया विरोध
कादरचौक। कासगंज के प्रशासन को सीमा के पास बदायूं प्रशासन द्वारा जमीन जोतने की सूचना मिली तो वहां की राजस्व टीम और पुलिस भी आ धमकी। उन्होंने अपने क्षेत्र में कब्जा करने की शिकायत की। कासगंज की पटियाली तहसील के लेखपाल आदित्य गौतम, कानूनगो और पुलिस टीम आई तो एसडीएम बदायूं पारसनाथ मौर्य ने उनका नक्शा देखा। कहा कि उनकी कार्रवाई भूमाफिया के खिलाफ है न कि किसी जिले की सीमा में अतिक्रमण की। कहा कि सीमांकन के लिए दोनों जिलों की टीम बना ली जाए। आपके जिले की जमीन हो तो आप भी खाली कराने में मदद करें। संतुष्ट होकर कासगंज की टीम वापस चली गई।
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सीमा विवाद में चली थी गोली
कादरचौक। 2009 में सुंदरायन की चकबंदी के समय कासगंज और बदायूं के सीमा विवाद के कारण पुलिस और चकबंदी अधिकारियों के सामने गोली चल गई थी। इसमें एक गोली चकबंदी अधिकारी की गाड़ी में लगी जिससे वह बाल-बाल बच गए थे। टीम को यहां से भागना पड़ा था।
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