एक रेक को तो गोदाम आने से पहले ही लगा दिया था ठिकाने
बदायूं। करीब तीन करोड़ के खाद घोटाले में कई विभागीय अफसरों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। चर्चा है कि जांच के बाद उन पर गाज गिरना तय है। फिलहाल, डीएम दिनेश कुमार सिंह इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रहे है कि आखिर वह खाद है कहां। जानकार बता रहे हैं कि बरेली से खाद की एक रेक गोदाम तक पहुंची ही नहीं थी, उसे रास्ते में ही ठिकाने लगा दिया गया था। खुलासे के बाद से पीसीएफ अधिकारियों-कर्मचारियों में खलबली मची है।
रबी की फसल को यूरिया, एनपीके और डीएपी की खाद की जरूरत होती है। हर किसान सरकारी दाम पर मिलने वाली इस खाद को खरीदने का प्रयास करता है। जब किसानों को खाद नहीं मिली तब शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचीं। जिस पर जांच के बाद आज यह पूरा घोटाला प्रशासनिक अधिकारियों के सामने आया। पीसीएफ सूत्र बता रहे हैं कि बरेली से यूरिया, एनपीके और डीएपी की खाद आती है। इसमें से यूरिया की पूरी रैक पीसीएफ गोदाम तक पहुंची ही नहीं। घोटालेबाजों ने उसे रास्ते में ही ठिकाने लगा दिया। गोदाम में 3102 मीट्रिक टन यूरिया, डीएपी और एनपीके खाद जांच टीम को अभिलेखों के मुताबिक कम मिली। यह कम कैसे हुई इसका कोई जवाब नहीं दे पाया। जांच टीम ने डीएम को पूरी रिपोर्ट दे दी है।
सूत्र बता रहे हैं कि टीम ने इस पूरे मामले में पीसीएफ अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ ही ठेकेदार को जिम्मेदार माना है। साथ ही उन्होंने सभी समितियों की जांच कराने की भी बात कही है। ताकि खाद घोटाले से पूरी तरह से परत उठ सके।
-----------
गोदाम प्रभारी के भाग जाने से जांच हुई प्रभावित
जांच टीम को देखकर गोदाम प्रभारी जगत पाल भाग गया था। जिसकी वजह से उसके गोदाम की जांच नहीं हो सकी। जांच टीम ने इस बात का उल्लेख भी किया है।
---
किसानों को खरीदनी पड़ेगी खुलेबाजार से महंगी खाद
इतनी मात्रा में यूरिया, डीएपी और एनपीके खाद को ठिकाने लगा देने से जिले में खाद का संकट खड़ा हो गया है। जबकि इस समय किसान को इस खाद की ज्यादा जरूरत है। ऐसे में किसानों को सहकारी समितियों से खाद नहीं मिल सकेगी। लिहाजा, उन्हें खुले बाजार से ही महंगे दामों पर यह खाद खरीदनी पड़ेगी। इससे इंकार नहीं किया जा सकता।
--------
इन्होंने की थी खाद घोटाले की शिकायत
भाजपा नेता अशोक भारती, युवा नेता पारस ने पीसीएफ गोदाम में करोड़ों के खाद घोटाले की शिकायत डीएम से की थी। डीएम भी उनकी शिकायत को सुनकर चौक गए थे। ऐसे में उन्होंने तत्काल ही जांच को टीम मौके पर भेज दी तो मामला सही निकला।
---------------
निजी दुकानों पर भी पड़ सकते हैं छापे
खाद घोटाले के बाद जिला प्रशासन किसी तरह की रियायत बरतने को तैयार नहीं है। ऐसे में इस बात की चर्चा है कि पूरे जिले में निजी खाद विक्रेताओं के यहां पर छापामारी होगी।