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कारतूस चोरी प्रकरण : अब बिल्सी थाने के पुराने हेड मोहर्रिर पर एफआईआर

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बदायूं/बिल्सी। उघैती थाने के बाद अब बिल्सी थाने के मालखाने में कारतूस चोरी का मामला सामने आया है। हालांकि ये भी मामला साल 2016 का है। उस दौरान तत्कालीन सीओ के निरीक्षण में कारतूसों की संख्या कम मिली थी। तत्कालीन एसपी देहात मुन्नालाल ने उसी दौरान एफआईआर के आदेश दिए थे लेकिन बाबुओं ने फाइल दबा ली। अब थाना पुलिस ने एसएसपी के आदेश पर हेड मोहर्रिर सुभाष चंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। फाइल दबाने वाले बाबुओं के खिलाफ भी जांच शुरू कर दी गई है।
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इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा के मुताबिक मामला मार्च 2016 का है। उस दौरान बिल्सी थाने में हेड मोहर्रिर सुभाष चंद्र तैनात थे। 30 मार्च 2016 को तत्कालीन सीओ बिल्सी थाने आए थे। उन्होंने थाने का निरीक्षण करने के अलावा शस्त्रों और कारतूसों का भौतिक सत्यापन भी किया था। उस समय सूची के अनुसार 194 कारतूस गायब मिले थे। उनमें 303 बोर रायफल के 113, 38 बोर रिवाल्वर के 52, एसएलआर के 22, एंटी राइटगन के तीन और रबर गन के चार कारतूस कम मिले थे। इस पर उन्होंने कारतूस कम होने पर हेड मोहर्रिर से स्पष्टीकरण भी मांगा था लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे सका। इस पर सीओ ने अपनी जांच आख्या तत्कालीन एसपी देहात मुन्नालाल को सौंपी। 12 मई 2016 को उन्होंने जांच आख्या संपादित कर एसएसपी को दे दी।
इसके बाद ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी बदायूं से फाइल का अवलोकन कर विधिक राय उपलब्ध कराने के लिए प्रेषित की गई। उन्होंने अपनी विधिक आख्या में हेड मोहर्रिर सुभाष चंद्र को दोषी पाया था। इससे उनके खिलाफ सरकारी कारतूसों को गबन करने के अपराध में धारा 409 के तहत एफआईआर दर्ज करने की राय दी गई। अब इस मामले को संज्ञान लेकर एसएसपी डॉ. ओपी सिंह के आदेश पर तत्कालीन हेड मोहर्रिर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
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फाइल दबाने वाले लिपिक भी फंसेंगे, जांच शुरू
कारतूस चोरी के मामले में उघैती और बिल्सी थाने में पांच साल बाद एफआईआर हुई है। जबकि दोनों मामलों में उसी दौरान एफआईआर के आदेश दे दिए गए थे। इसके बावजूद दोनों मामलों की फाइल दबा दी गईं। उन्हें कभी प्रकाश में ही नहीं लाया गया। इससे दोनों मामलों को पांच साल गुजर गए लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। वह तो गनीमत रही कि पुलिस ने दोनों थानों के पुराने रिकॉर्ड दिखवाए। इससे यह मामले सामने आ गए। अन्यथा इस बार भी मामले दबे रहते और उनमें कार्रवाई नहीं होती।
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पहले भी दर्ज हुईं थीं एफआईआर, गिरफ्तारी नहीं
उघैती और बिल्सी थाने में दर्ज हुए यह मामले पहले नहीं हैं। इससे पहले भी उघैती थाने में एक मामला दर्ज हुआ था। साल 1995 में उघैती थाने से एक पोटली गायब हो गई थी। उसमें कुछ सोने के जेवर और सरकारी असलहों के कारतूस थे। तब हेड मोहर्रिर राजवीर सिंह थे। पोटली गायब होने पर राजवीर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। राजवीर सिंह सिविल लाइंस थाने ट्रांसफर होकर आए तो यहां भी सरकारी असलहों के कारतूस गायब हो गए। इससे सिविल लाइंस थाने में भी राजवीर सिंह के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई। दोनों मामलों में चार्जशीट लग चुकी है लेकिन हेड मोहर्रिर को गिरफ्तार नहीं किया गया।
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बिल्सी इंस्पेक्टर करेंगे कारतूस चोरी की जांच
उघैती थाने से कारतूस चोरी के मामले की जांच बिल्सी इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा को सौंप दी गई है। ये मामला साल 2016 का है। उस समय उघैती थाने में हेड मोहर्रिर मोहम्मद अली शेर तैनात थे। उस दौरान तत्कालीन सीओ की जांच में थाने से 303 बोर रायफल के 68, नाइन एमए पिस्टल के 23, एसएलआर के 19, पीएमएफ के आठ और पंपगन एक्शन गन के तीन कारतूस कम पाए गए थे। इसमें तत्कालीन एसपी देहात ने एफआईआर के आदेश दिए थे लेकिन फाइल दबी रही। अब एफआईआर दर्ज कर ली गई है और इसकी जांच बिल्सी इंस्पेक्टर को सौंपी गई है।
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उघैती और बिल्सी थाने में कारतूस गायब होने के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई हैं। ये दोनों मामले साल 2016 के हैं। इसकी जांच उसी समय हो गई थी। एफआईआर के आदेश भी हो गए थे लेकिन दोनों मामलों की फाइल दबा दी गई। इससे कार्रवाई नहीं हुई। कार्यालय के किस लिपिक ने फाइल दबाई थीं। इसकी विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। उसके खिलाफ भी कार्रवाई कराई जाएगी।
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- सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात
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