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लॉकडाउन में गहराती गई नौकरी की चिंता और जान दे दी

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अलापुर (बदायूं)। अलापुर क्षेत्र के ग्राम वमनपुरा चितौरा निवासी बीएससी पास छात्र ने आत्महत्या क्यों की। इसकी पुष्टि तो नहीं हुई है लेकिन परिवार वाले बता रहे हैं कि छात्र नौकरी न मिलने से परेशान था। 2018 में सिपाही भर्ती में एक नंबर से रह गया था। जिससे उसे सबसे ज्यादा मानसिक पीढ़ा पहुंची। इधर लॉकडाउन में बेरोजगारी के माहौल ने उसे और उदास कर दिया। प्रबल संभावना है कि इससे वह उबर नहीं पाया और जान दे दी।
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ग्राम वमनपुरा चितौरा निवासी रोहित कुमार पुत्र मुनीश पढ़ाई में काफी होशियार था। वह जैसे-जैसे आगे कक्षा पास करता गया। परिवार वाले उसे पढ़ाते गए। उसने हाईस्कूल और इंटरमीडियट की परीक्षा अलापुर के नेहरू आदर्श इंटर कॉलेज से पास की। फिर एटा के एक महाविद्यालय से बीएससी की। बीएससी किए हुए उसे तीन साल हो चुके थे। तब से लगातार नौकरी के लिए प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था। बीच-बीच में नौकरी पाने के लिए आवेदन भी कर रहा था। परिवार वालों के मुताबिक वर्ष 2018 में उसने सिपाही भर्ती में आवेदन किया था। अलीगढ़ में उसकी परीक्षा हुई थी, मृतक के परिजनों की मानें तो उस परीक्षा में उसका एक नंबर कम रह गया था। जिससे वह उत्तीर्ण नहीं हो सका।
उसके बाद उसका मन बहुत उदास रहने लगा था। इस समय रोहित बरेली में अपने चाचा के साथ जरूर रह रहा था लेकिन नौकरी के लिए लगातार प्रयासरत था। हाल में मुरादाबाद की पीतल कंपनी में जगह निकली तो उसने आवेदन किया लेकिन वह इंटरव्यू देने नहीं जा सका। वह मुरादाबाद जाने की बात कहकर चाचा के घर से निकला था और अपने घर पहुंच गया। उसने ऐसा क्यों कि तो वही जानता होगा लेकिन घर आकर उसने मौत को गले लगा लिया। छात्र की मौत से उसके परिवार वाले भी स्तब्ध हैं। वह खुद समझ नहीं पा रहे हैं कि युवक ने ऐसा कदम क्यों उठाया।
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कुछ दिन पहले हुआ था भाई से विवाद
रोहित दो भाइयों में छोटा था। उसकी अभी शादी नहीं हुई थी। मां की उसके बचपन में ही मौत हो गई थी। उसे दादा-दादी ने पाला था। वह दादा-दादी का लाडला भी था। उसके बड़े भाई की शादी हो चुकी है। उसकी भाभी और पिता गांव में रहते हैं लेकिन भाई बाहर काम करता है। बताते हैं कि कुछ दिन पहले उसका अपने भाई से विवाद हो गया था। उसके दादा-दादी ने बड़े भाई का विरोध किया। वह नहीं माना तो दादा-दादी अपने दूसरे बेटे यानी रोहित के चाचा के पास बरेली पहुंच गए। रोहित के मायूस होने की वजह ये भी बताई जा रही है।
लॉकडाउन के कारण लोग वैसे भी तनाव में आ गए हैं। युवाओं में बेरोजगारी या फिर पढ़ाई के बाद रोजगार न मिलने पर उनमें मानसिक तनाव होने लगता है। समाज में अपनी पहचान बनाने तथा भविष्य की चिंता भी इसका कारण होती है। जब वह ज्यादा मानसिक दबाव में आ जाते हैं तो अक्सर वह ऐसे कदम उठा लेते हैं। इस बारे में अभिभावकों को सचेत रहना चाहिए। बच्चों के साथ समय बिताएं तथा उनकी परेशानी शेयर करें। हमेशा उनके साथ होने का आश्वासन उन्हें हमेशा देते रहना चाहिए।
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- डॉ. नरवीर यादव, वरिष्ठ परामर्शदाता, मानसिक रोग, प्रेमलोक हॉस्पिटल
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