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खुफिया तंत्र फेल, जेल से फरार अपराधी सुमित हुआ दो लाख का इनामी

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बदायूं जिला जेल। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। मई 2018 में जिला कारागार से फरार अपराधी सुमित एक बार फिर बदायूं पुलिस को याद आया है। कानपुर कांड के बाद प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद पुलिस ने फरार अपराधी की तलाश तेज कर दी है। गोपनीय ढंग से सुमित पर दो लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया गया है। हालांकि पुलिस अब तक सुमित की लोकेशन का पता नहीं लगा सकी है।
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कुख्यात अपराधी सुमित पुत्र रामवीर मूलरूप से मुरादाबाद जिले में हजरतनगर थाना क्षेत्र के नवमनी गद्दी का रहने वाला है। उसने 23 फरवरी 2015 को डिलारी (मुरादाबाद) के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख भूरा की मुरादाबाद जिले की भरी कचहरी में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके कुछ दिन तक सुमित मुरादाबाद जेल में बंद रहा। उसके बाद सितंबर 2015 में उसे बदायूं जेल लाया गया था। यहां उसकी दोस्ती गोरखपुर के शातिर अपराधी देवकी नंदन उर्फ चंदन सिंह से हो गई थी। चंदन पर भी दो दर्जन से अधिक मुकदमे हैं। चंदन को वर्ष 2017 में अलीगढ़ जेल से लाकर यहां शिफ्ट किया गया था। इसके कुछ समय बाद चंदन बीमारी का बहाना बनाकर आगरा के मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो गया। फिर, वहीं से पुलिस कर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया। काफी खोजबीन के बाद चंदन लखनऊ की तरफ से पकड़ा गया जिसके बाद उसे दोबारा लाकर यहां शिफ्ट कर दिया गया। दोनों शातिर अपराधी थे। इसलिए दोनों में गहरी दोस्ती हो गई थी। इससे दोनों ने एक साथ जेल से भागने की योजना बनाई थी।
12 मई 2018 की रात करीब पौने आठ बजे जेल के बाहर से रस्सी फेंकी गई। इस पर चढ़कर सुमित भागने में कामयाब रहा लेकिन चंदन पैर फिसलने से अंदर ही गिर गया। चंदन के पास से एक पिस्टल भी बरामद हुई थी। तब से लेकर आज तक सुमित का कुछ पता नहीं चला है। उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई गईं थीं। 21 मई को उस पर पचास हजार का इनाम घोषित किया गया। पुलिस को इतनी सफलता जरूर मिली कि उसका एक सहयोगी पकड़ा गया था। फिर धीरे-धीरे बदायूं पुलिस सुमित को भूल गई। उसकी फाइल जैसे बंद ही कर दी गई। लेकिन उसके ऊपर इनाम की धनराशि बढ़ती गई। अब सुमित दो लाख रुपये का इनामी हो चुका है। उसकी गिनती टॉपटेन बदमाशों में है लेकिन वह कहां है, इसकी पुलिस को जानकारी ही नहीं है।
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चंदन भी फरार होता तो और ज्यादा होती मुश्किलें
मई 2018 में कुख्यात अपराधी सुमित तो भागने में कामयाब रहा था लेकिन चंदन पैर फिसलने से नीचे गिर गया था। चंदन सुमित से कम शातिर नहीं था। उस समय चंदन की हालत कुछ खराब थी। इससे वह एक ही बार रस्सी चढ़ पाया था। दोबारा रस्सी चढ़ता, उससे पहले ही उसके हाथ जवाब दे गए। अगर उस दिन चंदन फरार हो जाता तो शायद बदायूं पुलिस के लिए और ज्यादा मुश्किलें होतीं।
कई जिलों की पुलिस और एसटीएफ हो चुकी है नाकाम
कुख्यात अपराधी सुमित की तलाश में केबल बदायूं पुलिस ही नहीं बल्कि मुरादाबाद, बरेली पुलिस के अलावा एसटीएफ भी तलाश कर रही है। उसे तलाश करते हुए पूरे दो साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक सुमित का सुराग तक नहीं लगा है। ऐसा माना जा रहा है कि जैसे पुलिस के सारे खुफिया तंत्र फेल हो चुके हैं।
जेल में पिस्टल पहुंचाने वाला सिपाही कौन, पुलिस मौन
वैसे तो जिला कारागार में हर बंदी की तलाशी ली जाती है। समय-समय पर अधिकारी जेल पहुंचकर छानबीन करते हैं लेकिन उस समय जेल में पिस्टल पहुंचना व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने जैसा था। काफी पूछताछ के बाद चंदन ने कबूला था कि एक सिपाही की मदद से पिस्टल जेल में लाई गई थी। उसने सिपाही का नाम भी बताया था लेकिन सिपाही कहां तैनात है, ये नहीं बताया था। आज तक पुलिस ये पता नहीं लगा पाई कि पिस्टल किसने पहुंचाई। न ही इस मामले का खुलासा हो सका।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस समय जिले के अपराधियों का डाटा खंगाला जा रहा है। इनमें एक अपराधी सुमित भी है। उस पर दो लाख रुपये का इनाम है। हालांकि ये मामला हमारे समय का नहीं है। जब ये डाटा खंगाला गया, तब उसका नाम सामने आया है। उसकी तलाश कौन सी टीम कर रही थी। जांच कहां तक पहुंची, फिलहाल इसका पता लगाया जा रहा है। - प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी
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