फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपहरण के मामले में पिता-पुत्रों सहित चार को दस-दस साल की सजा

विज्ञापन
विज्ञापन
बदायूं। पति-पत्नी के बीच चल रहे मारपीट के मुकदमे में दबाव बनाने को पत्नी के अपहरण के मामले में जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने पति, ससुर और देवर सहित चार को दस-दस साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी डाला है। एक अन्य आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
विज्ञापन

पत्नी के अपहरण का मामला थाना उझानी क्षेत्र का है। बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव भिलौलिया निवासी बलबीर पुत्र बदन सिंह ने तीन अक्टूबर 2009 की घटना को लेकर थाना उझानी पर कोर्ट द्वारा 156 (3) के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक बलवीर अपनी बहन खजानो देवी के साथ उसके मुकदमे की तारीख के लिए गांव से पैदल जा रहा था। जब वह दोनों उझानी मिहौना के बीच ज्यारत के पास पहुंचे तो वहां पहले से एक कार में खजानो देवी का पति कृष्णपाल और उसका भाई भगवान सिंह पुत्रगण छत्रपाल सिंह, छत्रपाल पुत्र लक्ष्मन, वीरेशपाल सिंह पुत्र रोहन सिंह निवासीगण मदारपुर थाना जरीफनगर जिला बदायू और सौदान सिंह पुत्र भोजराज सिंह निवासी मैदपुर थाना उघैती मिले। सभी के पास नाजायज हथियार थे। कृष्णपाल के साथ सभी ने उसकी बहन खजाना देवी को जबरन कार में डाल लिया। जब बलवीर ने शोर मचाया तो कृष्णपाल, भगवान सिंह, छत्रपाल ने कहा खजानो देवी को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद वे उसका अपहरण करके ले गए। पुलिस ने विवेचना के बाद कृष्णपाल सिंह, भगवान सिंह, छत्रपाल, सौदान सिंह के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। बलवीर ने वीरेशपाल पुत्र रोहन सिंह के खिलाफ कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोपी बनाया। जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी अनिल सिंह राठौड़ और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद हत्या के उद्देश्य से पत्नी के अपहरण के मामले में पति कृष्णपाल सिंह, भगवान सिंह, छत्रपाल और सौदान सिंह को मुजरिम करार दिया। कोर्ट ने सभी को दस-दस साल की सजा सुनाई है। साथ ही चारों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। कोर्ट ने वीरेशपाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें