बदायूं। एक तरफ भाजपा सरकार का बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ अभियान चल रहा है, तो वहीं सिविल लाइंस थाने में न्याय मांगने आई एक विवाहिता का शांति भंग में चालान कर दिया गया। इससे एसएसपी कार्यालय से लेकर डीएम कार्यालय तक अफरातफरी का माहौल रहा। बाद में पुलिस ने उसे उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब कहीं विवाहिता अपनी जमानत लेकर घर के लिए रवाना हुई।
शुक्रवार को बिनावर थाना क्षेत्र के ग्राम घटपुरी निवासी मीरा सिंह एसएसपी कार्यालय पहुंची। उनका आरोप था कि पुलिस उनके द्वारा दर्ज कराए गए मामले में धाराएं हटाकर आरोपियों को छोड़ने की फिराक में है। दरअसल मीरा सिंह ने 11 जुलाई को बिनावर थाने में जिला पंचायत सदस्य अपने पति संदीप सिंह उर्फ लक्खा, उनके भाई सरवन सिंह, भाभी रामा देवी और विट्टन देवी पत्नी अमर पाल के खिलाफ धारा 307 और दहेज उत्पीड़न के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसकी जांच क्राइम ब्रांच कर रही थी। मीरा सिंह का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों के साथ मिलकर कुछ लोगों को निकाल दिया है। उनसे धारा 307 भी हटा दी गई है। शुक्रवार को वह एसएसपी कार्यालय में ‘मुझे न्याय चाहिए’ का बोर्ड लेकर खड़ी थीं। तभी एसएसपी के आदेश पर उन्हें सिविल लाइंस थाने भेज दिया गया, जहां से उनका शांतिभंग में चालान कर दिया गया। उन्हें सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में पेश किया गया। सिटी मजिस्ट्रेट ने उन्हें जमानत तो दे दी लेकिन उस समय कलक्ट्रेट में कमिश्नर और डीआईजी की मीटिंग दौरान विवाहिता ने उनसे मुलाकात करने की बात कही। इस पर कई अधिकारी और पुलिस अधिकारी पहुंच गए। उन्होंने विवाहिता को समझाया कि शनिवार सुबह पूरे मामले की प्रगति रिपोर्ट उन्हें सौंप दी जाएगी। तब कहीं विवाहिता अपने घर के लिए गई। मीरा सिंह का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ बहुत गलत किया है। इसकी शिकायत महिला आयोग से करेंगी। उच्चाधिकारियों को भी बताएंगीं।
मीरा सिंह थाने में खड़े होकर आत्महत्या करने की बात कह रही थी। उन्होंने कोशिश भी की थी, जिससे उनका शांतिभंग में चालान किया गया। उनके मामले की जांच क्राइम ब्रांच में चल रही है। वहीं से उनके मामले में कार्रवाई होगी।
-ओपी गौतम, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस