बदायूं। जिस तरह कछला स्थित अस्थायी गोशाला में गोवंशीय पशुओं की मौत का सिलसिला शुरू हुआ, उससे तो यही लग रहा है कि किसी ने साजिश के तहत उनकी नांद में जहर डाला, तो वहीं एक के बाद एक गोवंशीय पशुओं की मौत देखकर माना जा रहा है कि जहर की मात्रा भी ज्यादा होगी, जिससे एक घंटे के अंदर 22 गोवंशीय पशु मर गए, जबकि नौ गोवंशीय पशु जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। देर रात मिली जानकारी के अनुसार आईवीआरआई बरेली से एक टीम रात को कछला पहुंच जाएगी जो रात में ही पोस्टमार्टम करेगी।
उझानी कोतवाली क्षेत्र के कस्बा कछला में गंगा घाट किनारे एक अस्थायी गोशाला बनी है। इस गोशाला में कुल 76 गोवंशीय पशु थे। इनकी देखभाल के लिए पांच कर्मचारी तैनात हैं, जिनमें दो कर्मचारी दिन और तीन रात के समय पशुओं की देखभाल करते हैं। बताते हैं कि रविवार शाम होते ही दिन वाले कर्मचारी अपने-अपने घरों को रवाना हो चुके थे, जबकि रात वाले कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली थी। उन्होंने शाम करीब साढ़े छह बजे हरे बाजरे की कुटी भूसा में मिलाकर गोवंशीय पशुओं को डालना शुरू किया। तीनों कर्मचारियों ने करीब 40 पशुओं को ही चारा डाला था कि तब तक पशुओं का बेहोश होकर गिरना शुरू हो गया। पहला पशु गिरा तो कर्मचारियों ने समझा कि वह वैसे ही गिर गया होगा लेकिन एक के बाद एक गिरते देखकर उनके होश उड़ गए। नगर पंचायत चेयरमैन नरेश यादव और सफाई नायक अमरनाथ शर्मा के पहुंचने तक 22 गोवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी थी, जबकि नौ पशु जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. एके जादौन के मुताबिक गोवंशीय पशुओं की मौत जहरीला चारा खाने से हुई है। अब उनके भूसा या नांद में जहर कहां से आया। इसका अभी पता नहीं चला है।
सोरों से मंगाई गई थी हरे बाजरे की कुटी
रविवार को कासगंज जिले के सोरों से हरे बाजरे की कुटी मंगाई गई थी। इसके लिए नगर पंचायत द्वारा ट्रैक्टर-ट्रॉली सोरों भेजा गया था। जिसमें लादकर कुटी आई थी। उसी कुटी को भूसे में मिलाकर डाला गया था।
एसएसपी भी पहुंचे मौके पर
गोवंशीय पशुओं की मौत की सूचना मिलने के बाद एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी भी वहां पहुंच गए। पशुओं की मौत पर उन्होंने दुख जताया। उन्होंने सीवीओ से कहा कि बचे सभी पशुओं की जांच की जाए। किसी को ऐसे ही नहीं छोड़ा जाए। हो सकता है कि उनके पेट में भी चारा पहुंचा हो और उनकी भी हालत खराब हो जाए।