उझानी (बदायूं)। खाताधारकों के करोड़ों रुपये डकारकर लापता प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया नामक कंपनी को खोजने के लिए पुलिस हरकत में आ गई है। एसएसपी के आदेश पर रविवार को पुलिस बसोमा गांव पहुंची और आरोपी अभिकर्ता समेत खाताधारकों से पूरे मामले की जानकारी की। खाताधारकों ने अभिकर्ता की भूमिका पर सवाल उठाया तो उसे कोतवाली में तलब कर लिया गया। उसने यह भी भरोसा दिलाया कि वह खाताधारकों को कंपनी के प्रमुख कारिंदों से मिलवाने में भूमिका निभाएगा। इसी के साथ पुलिस ने शिकायत से जुड़े अहम बिंदुओं पर जांच शुरू कर दी है।
प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए बसोमा निवासी खाताधारकों ने शनिवार को एसएसपी कार्यालय में पहुंचकर शिकायत की थी। एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने जांच का आदेश दिया था। दरोगा जितेंद्र सक्सेना रविवार सुबह बसोमा पहुंचे। उन्होंने कई खाताधारकों से बात कर पूरे मामले की जानकारी की। खाताधारकों ने उन्हें यह भी बताया कि ज्यादातर आरडी मैच्योर हो चुकी हैं लेकिन भुगतान करने की बजाय कंपनी के कार्यालय पर ताला डालकर मैनेजिंग डायरेक्टर समेत प्रमुख कारिंदे गायब हो चुके हैं। बसोमा के ही निवासी अभिकर्ता नंदकिशोर तो पुलिस को नहीं मिला लेकिन उसके बेटों समेत परिजनों से कंपनी के बारे में जानकारी की गई। अभिकर्ता को कोतवाली में तलब किया गया है। खाताधारकों में धर्मपाल, मदनलाल और गौरव साहू ने बताया कि कंपनी के कुछेक कारिंदे बदायूं जिले के ही निवासी हैं। पुलिस उनसे पूछताछ करे तो धोखाधड़ी करने वाले लोग भी पकड़ में आ सकते हैं। खाताधारकों ने यह बात पुलिस को भी बता दी है।
बता दें कि करीब छह साल पहले ग्रामीणों ने प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया में एक हजार रुपया प्रति माह की आरडी खुलवाई थीं। आरडी मैच्योर होने के बाद प्रत्येक खाताधारक को 1.14 लाख रुपये मिलने थे, जो किसी को भी मुहैया नहीं कराए गए। इसके बाद से धोखाधड़ी की सुगबुगाहट शुरू हुई थी जो अब अफसरों के संज्ञान में पहुंच चुकी है। इधर, इस मामले में जांच कर रहे दरोगा जितेंद्र सक्सेना ने बताया कि फिलहाल सच्चाई का पता लगा रहे हैं, जांच में जो भी सामने आएगा उसके आधार पर कार्रवाई होगी।
खाताधारकों की संख्या एक हजार के पार
उझानी। धोखाधड़ी का आरोप लगाकर पूरे मामले को अफसरों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे पीड़ित गौरव साहू की मानें तो कोतवाली क्षेत्र में ही गठौना और रनऊ, कादरचौक, बिल्सी और सिविल लाइंस क्षेत्र में भी सैकड़ों खाताधारक हैं जिन्होंने प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया में इंवेस्ट किया था। एक हजार से अधिक लोगों के रुपये जमा हो चुके हैं। अभिकर्ताओं ने भी कमीशन के रूप में मोटी कमाई की है, उनकी भी जवाबदेही बनती है कि खाताधारकों की रकम वापस कराएं।
26 करोड़ रुपये का चूना लगा चुके हैं मामा-भांजे
बदायूं। प्रेस्टीज ग्रीन इंडिया कंपनी से पहले मथुरा के मामा-भांजे बदायूं के करीब 20 हजार लोगों को 26 करोड़ रुपये का चूना लगा चुके हैं। इनमें कल्पतरु के मालिक जय किशन सिंह राणा का दो बार वारंट भी जारी हो चुका है लेकिन अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। उसका भांजा भी मथुरा से भाग चुका है।
मथुरा निवासी जयकिशन सिंह राणा ने बदायूं में कल्पतरू विल्टेक कॉरपोरेशन लिमिटेड कंपनी खोली थी। उसने करीब पंद्रह हजार लोगों को अपना एजेंट बनाया था। फिर उनके माध्यम से करीब 20 करोड़ रुपये लोगों के जमा करा लिए। ठीक इसी तर्ज पर राणा के भांजे भानु प्रताप सिंह ने कल्पवट कंपनी खोली थी। उसने करीब पांच हजार लोगों को एजेंट बनाया और उनके माध्यम से लोगों के छह करोड़ रुपये जमा कराए। उसके बाद दोनों मामा-भांजे अपनी कंपनी बंद कर एक-एक कर जिले से चंपत हो गए। जय किशन सिंह राणा के खिलाफ कोर्ट में मुकद्दमा चल रहा है। उसके दो बार वारंट भी जारी हो चुके हैं लेकिन राणा अभी तक कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ है। वहीं दूसरी ओर भानुप्रताप सिंह भी मथुरा से भाग गया है। अभी तक पुलिस उसे भी नहीं पकड़ सकी है। भानु प्रताप सिंह की करोड़ों की संपत्ति बदायूं जिले में है।
------------------------
आखिर कब समझेगी जनता, भाग चुकी हैं दर्जनों कंपनियां
- कई साल से फर्जी कंपनियां खोलकर लोगों को ठगा जा रहा है। इसके बाद भी लोग बहकावे में आ रहे हैं। इससे पहले पर्ल्स कंपनी लोगों को चूना लगाकर भागी थी। उसके बाद तो कल्पतरू एग्रो, बायोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड, केबीसीएल, कल्पतरू मेगा मार्ट, कल्पतरू विल्टेक, कल्पतरू न्यू विल्टेक, प्रसून फाइनेंस, एनवीएफसी, कल्पतरू फूड प्राइवेट लिमिटेड, कल्पतरू लेदर, कल्पतरू एक्सप्रेस, कल्पतरू सेवा संस्थान, ओक इंडिया, कलाकृति, गोल्डन क्रेडिट कॉरपोरेशन सोसाइटी आदि कंपनी लोगों का करोड़ों रुपये लेकर भाग चुकी हैं।