बदायूं। बीकॉम के छात्र प्रशांत सैनी के अपहरण और हत्या में शातिर अपराधी हरीश पहाड़िया का ही दिमाग चला था। उस पर अनेक थानों में कई गंभीर मामले दर्ज हैं। चूंकि वह अपराध की दुनिया में होने की वजह से अपने बचाव को माननीयों से अच्छे संबंध रखता था, यही वजह थी कि इस कांड के बाद भी पुलिस ने हरीश पहाड़िया को शहर के एक माननीय की कोठी से गिरफ्तार किया था। अपराधी को शरण देने के मामले में उन माननीय के खिलाफ आज भी मुकदमा चल रहा है और वह इसी मामले में जमानत पर चल रहे हैं।
जालंधरी सराय का रहने वाला हरीश पहाड़िया लंबे अर्से से जरायम का दुनिया में है। प्रशांत सैनी के किडनेप और हत्या से पहले हरीश एक मामले में सेंट्रल जेल बरेली से जमानत पर आया था। उसने प्रशांत के घर के पास ही किराए पर कमरा ले लिया था। तभी उसकी प्रशांत से दोस्ती हो गई। प्रशांत के पिता अर्जुन सैनी की मिठाई की दुकान है। प्रशांत अपने चार बहन-भाइयों में सबसे बड़ा था। वह बीकॉम कर रहा था। दोस्ती होने की वजह से हरीश पड़ाहिया का उसके घर आना-जाना हो गया था, लेकिन हरीश के मन में कुछ और ही चल रहा था। सो उसने प्रशांत का अपहरण करके परिजनों से तीन लाख की फिरौती की मांग कर डाली। परिवार वाले यह रकम नहीं जुटा सके तब हरीश ने प्रशांत को मौत की नींद सुला लिया। विवेचना के बाद जो नाम आए, उन सभी को पुलिस ने गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे भेज दिया।
चूंकि हरीश पहाड़िया पर सफेदपोश नेताओं का हाथ था सो वह उनके शरण में रहने की वजह से पुलिस के हाथों गिरफ्तारी से लगातार बचता रहा, लेकिन पुलिस पर बड़े अधिकारियों का दबाव था कि किसी तरह हरीश को पकड़ा जाए। तब पुलिस ने अपना नेटवर्क बिछाते हुए हरीश को एक माननीय की कोठी से गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में उन माननीय पूर्व मंत्री को भी पुलिस ने अपराधी को शरण देने का आरोपी मानते हुए मामला दर्ज कराया। इस मामले में माननीय आज भी जमानत पर हैं।
जेल अफसरों को लिखता था पत्र-
हरीश पहाड़िया चूंकि कई मामलों में सलाखों के पीछे जा चुका था, लेकिन हर बार उसकी जमानत हो जाती थी। तब उसे जेल प्रशासन भी अच्छी तरह से जान गया था। कहा जाता है कि जब भी उसके संपर्क वाला व्यक्ति किसी मामले में जेल जाता था, तब वह जेल अफसरों को पत्र लिखता था कि मेरा भाई या परिचित आ रहा है। इसे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
परिजनों ने सजा पर जताया संतोष-
पीड़ित परिजनों ने प्रशांत सैनी के अपहरण और हत्या में आरोपी मुजरिमों को उम्रकैद की सजा होने पर संतोष जताया है। पिता अर्जुन सैनी ने कहा है कि उनका बेटा तो वापस नहीं आ सका, लेकिन उसके दुश्मनों को कोर्ट ने उम्रकैद की जो सजा सुनाई है, उससे उन्हें काफी हद तक राहत मिली है। यदि फांसी की सजा होती तो शायद ऐसे अपराधी कभी किसी की औलाद को नहीं मारते।