उझानी (बदायूं)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर बुधवार से ओपीडी शुरू हो गई। करीब चार महीना बाद अस्पताल में मरीजों की आवाजाही तो दिखी, लेकिन उनकी संख्या पहले के मुकाबले काफी कम रही। अस्पताल में कोरोना के मरीजों को भर्ती किए जाने की शुरुआत हुई, तभी से ओपीडी को बंद कर दिया गया था। यहां तक कि गर्भवती महिलाओं को भी प्रसव सुविधा के लिए कछला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सहारा लेना पड़ रहा था। अब, महिलाओं को प्रसव के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
मई में स्थानीय सीएचसी को कोविड-19 लेबल-वन के अस्पताल के रूप में तब्दील कर दिया गया था। अस्पताल में पहला कोरोना संक्रमित 24 मई को भर्ती हुआ था। इसके बाद अगस्त के पहले सप्ताह तक कोरोना संक्रमितों को भर्ती किए जाने का सिलसिला चलता रहा। बाद में यहां से लेबल-वन के संक्रमितों को बदायूं के आसरा आवासों में शिफ्ट किया जाने लगा तो सीएचसी खाली हो गई। सीएचसी के लिए हालांकि कोविड के अनुरूप सुविधा बहाल कराने के लिए खाली कराया गया था, लेकिन इसी दौरान बुधवार को ओपीडी शुरू कर दी गई। पहले दिन मरीजों की संख्या करीब तीन दर्जन रही। पहले की तरह पर्चे भी बने। इसी के साथ अस्पताल परिसर में गर्भवती महिला और नवजात बच्चों के टीकाकरण की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को भी प्रसव के लिए अस्पताल के वार्डों में भर्ती किया जाएगा। बता दें कि कोविड की वजह से नगर समेत आसपास इलाके की गर्भवती महिलाओं को कछला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया जाता रहा था।
अभी तक शुरू नहीं हो पाया वार्डों में मरम्मत का काम
उझानी। अगस्त महीना में डीएम के आदेश के बाद कोरोना संक्रमितों को बदायूं के आसरा आवासों में भर्ती किया जाना शुरू हुआ, तब सीएमओ डॉ. यशपाल सिंह ने कहा था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोविड लेबल-वन का अस्पताल बना रहेगा। मरीजों को उनके अनुरूप सुविधा मुहैया कराने को व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। कोरोना संक्रमितों ने व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कलई खोल दी थी। फिर भी अस्पताल परिसर में वार्डों समेत टायलेट और बाथरूमों की मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया है।