फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस की मनमानी पर कोर्ट का डंडा

Mon, 18 Jan 2016 10:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
विज्ञापन
विज्ञापन
उझानी के जोगेंद्र हत्याकांड में दाखिल एफआर निरस्त
विज्ञापन

सीजेएम ने एसएसपी को दिए निष्पक्ष जांच के निर्देश
पीड़ित ने उझानी पुलिस पर सांठगांठ का लगाया आरोप


 मृतक के पुत्र योगेश कुमार ने पिंकी गुप्ता व कमल गुप्ता के खिलाफ नामजद किया था। इस कांड की जांच पूर्व कोतवाल देवराज राठी ने शुरू की। उनका गैर जिले तबादला हो जाने के बाद मौजूदा कोतवाल गोपीचंद्र यादव जांच कर रहे थे। पुलिस की जांच से पीड़ित पक्ष संतुष्ट नहीं था। आखिर उनका अंदेशा सही निकला और पुलिस ने कोर्ट में जो एफआर और कस्टडी रिमांड प्रेषित किया, उसमें नामजद दोनों आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई थी।
पुलिस उनके अलावा पांच अन्य को इस मामले में आरोपी बना दिया, जबकि पीड़ित पक्ष उन पांचों की नामजदगी को लेकर संतुष्ट नहीं था। परिजनों का कहना था कि पुलिस ने जिन नामजद जितेंद्र, प्रेमपाल, बबलू, सौरभ उर्फ गब्बर व एक अन्य को दर्शाया, उन्हें वह जानते तक नहीं हैं। न ही उन्होंने इनमें किसी का नाम पुलिस को बताया है।
विज्ञापन

जब उझानी पुलिस ने इस मामले में कस्टडी रिमांड प्रार्थना पत्र एवं कोर्ट में एफआर को प्रेषित किया तब वादी पक्ष ने भी इस जांच को पूरी तरह गलत बताते हुए निष्पक्ष जांच को 15 जनवरी को प्रार्थना पत्र दिया। सीजेएम मोहम्मद असलम सिद्दीकी ने वादी पक्ष के प्रार्थना पत्र पर पुलिस के दाखिल एफआर पर गौर किया तो उसे  खारिज कर दिया। कोर्ट ने एसएसपी को इस मामले में निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। वादी पक्ष ने क्लीनचिट मिलने वाले आरोपियों से पुलिस द्वारा आर्थिक सांठगांठ कर लेने का भी आरोप लगाया था।
विज्ञापन

पुलिस की हुई फजीहत
कोर्ट द्वारा इस चर्चित मामले में दाखिल एफआर को खारिज कर दिए जाने से पुलिस की काफी किरकिरी हुई है। जैसे ही कोर्ट ने एफआर को खारिज किया, वैसे ही वादी पक्ष से जुड़े लोगों की जुबान पर यही था कि आखिर उन्हें न्याय मिला है। पुलिस को मुंह की खानी पड़ी है। उन्हें उम्मीद है कि असली आरोपियों को कोर्ट जरूर सजा देगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें