बदायूं। चार साल पहले अनुसूचित जाति की युवती के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट उदयभान सिंह ने एक व्यक्ति को मुजरिम ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 22 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
बिल्सी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 23 जून 2018 की रात योगेंद्र उसके घर में घुस आया। योगेंद्र ने उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया। बेटी के शोर मचाने पर परिजन और गांव के लोग इकट्ठे होकर आए, तभी मौका पाकर योगेंद्र भाग गया। इस घटना से उसकी बेटी को गहरा सदमा लगा। दो दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद योगेंद्र के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट उदयभान सिंह ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक ऐश्वर्य कुमार राजपूत, जितेंद्र सिंह और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस को सुना। कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में योगेंद्र को मुजरिम ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषसिद्ध पर 22 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मुजरिम को आत्महत्या को उकसाने और एससी एसटी एक्ट के आरोप से बरी कर दिया है।