बदायूं। साढे़े चार साल पहले जमीन के बंटवारे की रंजिश में सगे भतीजे की हत्या में नामजद चाचा-चाची सहित तीन को कोर्ट ने दोषी माना है। शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश नवम राखी दीक्षित ने मुजरिमों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने तीनों पर 35-35 हजार रुपये अर्थदंड भी डाला है।
थाना उसहैत क्षेत्र के गांव टिकाई निवासी बीनू ने 25 मार्च 2015 को रिपोर्ट लिखाई थी कि दिन में वह अपनी बहन शैलेश और भाभी ममता के साथ आंगन में बातें कर रहा था। उसका भाई डब्लू कमरे के अंदर सो रहा था। जमीन के बंटवारे की रंजिश की वजह से उसके सगे चाचा सुरेंद्र पुत्र सूबेदार उसकी चाची सुखदेवी और सुरेंद्र का साला लखनऊवा पुत्र जगत सिंह निवासी जिजौल थाना कादरचौक उसके आंगन में आ गए। वादी बीनू की चाची ने उसके चाचा सुरेंद्र से कहा कि डब्लू को आज जान से मार दो वरना यह हम लोगों को जीने नहीं देगा। इतना सुनते ही सुरेंद्र अपने घर के छप्पर में से हंसिया लेकर आ गया और उसके भाई को कमरे में अंदर जाकर गिरा लिया और हंसिया से उस पर ताबड़तोड़ वार करके उसको मौत के घाट उतार दिया। बीनू उसकी भाभी और बहन ने डब्लू को बचाना चाहा तो सुरेंद्र का साला लखनऊवा हाथ में तमंचा लिए उनको रोके रहा। चीख-पुकार पर गांव के लोग अपने घरों की छत पर आ गए, लेकिन सुरेंद्र के डर की वजह से कोई भी वादी के भाई डब्लू को बचाने नहीं आया। वादी बीनू ने अपने चाचा सुरेंद्र, चाची सुखदेवी और लखनऊवा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अपर सत्र न्यायाधीश राखी दीक्षित ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया, अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुकेश बाबू यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस को सुनने के बाद सुरेंद्र, सुखदेवी और लखनऊवा को हत्या में मुजरिम करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।