जिला पंचायत चुनाव की 40 घंटे चली मैराथन मतगणना के बाद सोमवार की शाम तक सभी 51 वार्डों के परिणाम घोषित कर दिए गए। परिणाम में देरी के कारण भाजपाइयों ने जिला पंचायत सभागार में जमकर हंगामा भी काटा। इस पर एडीएम की कई बार उनसे तीखी नोकझोक भी हुई। जिला पंचायत चुनाव में सपा को सत्ता की हनक का पूरा फायदा मिला। अघोषित रूप से लड़े सपा के सिपहसालारों ने करीब पैंतालीस फीसदी सीटों पर सफलता पाई है।
पिछली बार की चैपिंयन बसपा को इस बार उतनी सफलता नहीं मिली, जितनी उसको अपेक्षा थी। पिछला जिला पंचायत बोर्ड बसपा का था। बसपा की पूनम यादव अध्यक्ष हैं। उस समय 49 सीटें थीं, लेकिन नए परिसीमन में 51 सीटें हो गईं। बसपा ने दोबारा जिला पंचायत पर कब्जा के लिहाज से 49 सीटों पर समर्थित प्रत्याशी उतारे। इनमें सात प्रत्याशी जीतकर सदस्य बने हैं। वहीं भाजपा जिला पंचायत में शून्य से खड़ी हुई है। भाजपा ने 34 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे, तो आठ प्रत्याशी विजयी रहे। सपा ने कोई सूची नहीं जारी की। सपा ने बसपा से जिला पंचायत की सीट छीनने को सियासी कूटनीति का प्रयोग किया है। भाजपा और बसपा प्रत्याशी मिलाकर भी एक तिहाई नहीं है। इसलिए फिलहाल सपा को ही जिला पंचायत के अध्यक्ष पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
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मधु, प्रीति और दमयंती हो सकती हैं अध्यक्ष पद की दावेदार
बदायूं। किसी पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद को दावेदार की घोषणा नहीं की है लेकिन एससी महिला के लिए सीट सुरक्षित होने के कारण सपा विधायक आशुतोर्ष मौर्य की बहन मधु चंद्रा इसके लिए प्रबल दावेदारी में है। इसी प्रकार बसपा ने पूर्व विधायक योगेंद्र सागर की पत्नी प्रीति सागर को और भाजपा ने मैल्हापुर से विजयी दमयंती वर्मा को अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तुत किया है।
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सबसे अधिक मतों से अंकुर, सबसे कम वोटों से जीते विराट
बदायूं। जिला पंचायत में आसफपुर सीट से अंकुर यादव 5390 वोटों से विजयी हुए हैं। इनकी जिले में सबसे बड़ी जीत मानी गई है। अंकुर यादव सपा जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव के भतीजे हैं। इसके अलावा म्याऊं सीट से भाजपा समर्थित विराट दुबे सबसे कम मतों से विजयी हुए हैं। इनकी सबसे कम वोटो से जीत हुई है। इन्होंने अपने प्रतिद्वंदी दलवीर सिंह यादव को हराया है।