मंडी समिति परिसर के यार्ड में मतगणना का काम सुबह में निर्धारित वक्त पर शुरू कराके प्रशासनिक और पुलिस अफसरों ने जो तेजी का जो माहौल बनाया, वह दोपहर बाद तक चला। 10 बजे तक चार-पांच ग्राम पंचायतों के नतीजे सामने आ गए। बुटला खंजन, बेनीनगला, पतौरा, बुर्राफरीदपुर बरसुआ मिहौना आदि की मतगणना में ज्यादा देर नहीं लगी। दोपहर बाद तक करीब 40 प्रधानों को निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
अपराह्न में मतगणना की रफ्तार सुस्त देख बीडीओ (पीसीएस) प्रतिपाल सिंह और सीओ जगदीश सिंह के साथ कोतवाल देवराज राठी कर्मचारियों का हौसला बढ़ाते नजर आए। उन्होंने टेबिल के पास पहुंचकर गिनती के काम में तेजी लाने की यहकर सलाह दी कि जल्दी करते रहे तो रात में परेशानी से बचे रहोगे। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की रणनीति भी कुछ ऐसी थी कि जितना जल्दी हो सके, मतगणना निपटा दी जाए लेकिन सभी ग्राम पंचायतों के नतीजे आते-आते रात हो ही गई।
...जब हंस पड़े मतगणना कर्मी
उझानी। मंडी परिसर में वोटों की गिनती के दौरान प्रशासन ने प्रत्याशियों समेत उनके अभिकर्ताओं को चक्रानुसार बुलाने को लाउडस्पीकर की व्यवस्था की थी। लाउडस्पीकर पर एक बार सुनने को मिला कि फलां गांव के एजेंटों को अंदर कर दो। यह बोलने के पीछे हालांकि आशय था कि गेट पर मौजूद एजेंटों को परिसर में परिसर में भेज दिया जाए, लेकिन शब्दों गणित समझने वालों ने अर्थ भी उसी भाषा में निकाल लिया। सुनने में यह भी आया कि एडीओ साहब, कर्मचारियों को पानी पिलवाएं। मतलब- यही कि कर्मचारियों को पानी मुहैया कराने की व्यवस्था की की जाए लेकिन माइक पर फरमान देने वाले जल्दबाजी में शिष्ट भाषा का इस्तेमाल नहीं कर पाए। ऐसी ही कुछेक और बातें भी कही गई। मतगणना कर्मी भी बार-बार हंसते नजर आए।