किसानों के खेतों की उर्वरकता बर्बाद न हो जाए और मिट्टी के बीमार होने के शुरुआती दिनों में उसका उपचार करने के बारे में जानकारी देने के लिए जिले भर में किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लिए गए थे, लेकिन अभी तक उन नमूनों का परीक्षण नहीं किया जा सका है। अब तक केवल 2650 नमूनों का ही परीक्षण किया जा सका है, जबकि कृषि विभाग के पास 20 हजार से अधिक नमूने पड़े हुए हैं। इनका परीक्षण करने के लिए विभागीय अधिकारी चीनी मिलों की लैबों में भी बात कर रहे हैं।
जिले के खेतों की उर्वरता की जानने के लिए खेतों की मिट्टी का परीक्षण किया जाता है। इसके तहत जिले में इस बार 25 हजार 855 किसानों के खेतों से मृदा के नमूने लिए गए थे। इन नमूनों मुख्य तत्वों (नाइट्रोजन, पोटेशियम एवं फास्फोरस) के परीक्षण तो जिले में स्थित लैबों में हो जाते हैं। साथ ही विभिन्न सूक्ष्म तत्वों का परीक्षण कराने के लिए बरेली स्थित लैब में भेजा जाता है। अब जिले की चार लैबों में केवल 5555 मृदा नमूनों को भेजा जा सका हैं। इससे 20300 नमूने लिए जाने के बाद भी परीक्षण को भेजे नहीं जा सके हैं।
नमूनों के परीक्षण में हो रही देरी में प्रयोगशालाएं में मृदा परीक्षण का काम धीमी गति से होना और नमूनों की कागजी कार्रवाई पूरी न हो पाना बताया जा रहा है। इससे किसानों को उन लोगों की भूमि का हेल्थ कार्ड समय से नहीं मिल सकेगा, जिससे उनकी भूमि का उपचार करने में भी देरी होगी। मृदा नमूनों की जांच में तेजी से काम करने के लिए जिले में स्थित दोनों चीनी मिलों को पत्र भेजे गए है कि वे लोग चीनी मिल की लैब में मृदा का परीक्षण करें, जिससे समय से किसानों को मृदा परीक्षण की रिपोर्ट मिल सके।
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प्रयोगशालाओं में भेजी गई नमूनों की स्थिति
परीक्षण प्रयोगशाला संख्या
1. बिसौली 1711
2. सहसवान 1102
3. दातागंज 1500
4. सदर 1242
कुल नमूनों की संख्या 5555
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मृदा के नमूनों की जांच कराने निश्चित समय में पूरी न होने पर शासन से चीनी मिलों की लैब में मृदा का परीक्षण कराने के लिए कहा गया है। इस आदेश का पालन करते हुए चीनी मिलों को पत्र लिखा जा चुका है। वहां से सूचना मिलते ही मृदा के परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
-आरपी चौधरी, उप कृषि निदेशक