जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन। संवाद
- फोटो : kathua
बदायूं। जिला अस्पताल में करीब दो साल से कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। इसलिए गंभीर बच्चे रेफर किए जा रहे हैं। जरूरतमंद निजी अस्पतालों में बच्चों का इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं।
जिला अस्पताल में 26 डॉक्टर तैनात हैं। इनमें बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। दो साल पहले डॉ. कप्तान सिंह बाल रोग विशेषज्ञ के पद तैनात थे। एक मार्च 2023 को उन्हें प्रभारी सीएमएस बना दिया गया था। कुछ समय बाद ही उनको स्थाई तौर पर सीएमएस के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। तब से वह सीएमएस हैं। ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली हो गया है। उसके बाद से 18 बार सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह ने शासन को पत्राचार कर बाल रोग विशेषज्ञ की मांग की, लेकिन तैनाती नहीं हो सकी है। बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने से बच्चे के इलाज में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंभीर होने पर रेफर के अलावा डॉक्टरों के पास कोई विकल्प नहीं है। जरीफनगर क्षेत्र से आए श्याम कुमार ने बताया कि पांच साल के बेटे को बार-बार दौरे पड़ते हैं। जिला अस्पताल में आए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
रात में एक घंटे डॉक्टर का इंतजार...देखते ही कर दिया रेफर
जोरी नगला से आए ओमवीर ने बताया कि सोमवार की रात करीब नौ बजे सात साल के बेटे राहुल की अचानक तबीयत खराब हो गई। गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उम्मीद थी कि अस्पताल में अच्छा इलाज मिल जाएगा लेकिन यहां हालात बदतर हैं। पहले डॉक्टर का एक घंटे तक इंतजार किया। बाद में डॉक्टर आए तो देखते ही हायर सेंटर रेफर कर दिया।
कोट,
बाल रोग विशेषज्ञ मिले तो दूर हो समस्या
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह का कहना है कि दो साल से बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। तब से लगातार शासन से मांग की जा रही है। शासन से डॉक्टर की तैनाती हो तब कहीं जाकर बच्चों को सही इलाज मिल सके।
जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन। संवाद- फोटो : kathua