- जिले में कोरोना संकट को देखते हुए दुरुस्त की जा रहीं प्रोटोकॉल संबंधी व्यवस्थाएं
- सभी सीएचसी और पीएचसी पर कोरोना की जांच के लिए अलग से टीमें बनाई गईं
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिले में कोरोना का भले ही कोई नया मामला न आया हो, लेकिन अभी 15 दिनों तक इसका संकट छाए रहने का दावा स्वास्थ्य विभाग ने किया है। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना से निपटने की तैयारियों के बीच निगरानी के लिए पांच नोडल अफसर नामित किए हैं तो सभी सीएचसी-पीएचसी पर 17 टीमों का अलग से गठन किया गया है, ताकि वह सीएचसी-पीएचसी पर आने वाले लोगों का सैंपल लेकर कोरोना की जांच कर सकें।
कोरोना का संकट अभी 15 दिन छाया रह सकता है, इस बात का दावा स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। डब्ल्यूएचओ भी इस बात को कह रहा है कि 15 दिन तक यह नहींं कहा जा सकता कि संकट दूर हो गया है। इस वजह से स्वास्थ्य विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ अब काम कर रहा है। शासन के निर्देश पर मंगलवार को जिले भर के कोविड अस्पतालों में मॉकड्रिल कराई गई ताकि वहां व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जा सके। मॉकड्रिल के दौरान जहां भी अव्यवस्थाएं मिलीं उनको दुरुस्त कराया गया। अब सबसे ज्यादा जोर जांचों पर दिया जा रहा है। जांचों के साथ-साथ अगर संक्रमण फैला तो मरीजों को समय पर इलाज दिलाने के इंतजाम भी किए गए हैं। जिले की सभी सीएचसी-पीएचसी पर जांचों की संख्या बढ़ाए जाने को कहा गया है। इसके लिए सभी जांच केंद्रों पर एंटीजन किट भी पर्याप्त मात्रा में भेजी जा चुकी हैं।
नोडल अफसरों को एक-एक कोविड अस्पताल में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का जिम्मा सौंपा गया है। सीएमओ ने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा है कि अभी खतरा टला नहीं है, इसलिए सभी सतर्क रहें। संक्रमित सामने आने के बाद उसको तुरंत इलाज दिया जा सके यह व्यवस्थाएं रखी जाएं।
कोरोना की और मिलीं दवाएं, वैक्सीन की भी डिमांड
जिले में कोरोना संकट को देखते हुए कोरोना की और दवाएं मिली हैं। हालांकि पहले से कोरोना की दवाएं यहां मौजूद थीं, लेकिन उनकी एक्सपायरी डेट करीब आने की वजह से और दवाओं की डिमांड की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की डिमांड पर शासन ने और दवाओं का स्टॉक भेजा है। इसके अलावा जिन लोगों को वैक्सीन नहीं लगी है उनको वैक्सीन लगवाने के लिए वैक्सीन की भी डिमांड की गई है।
कोरोना का खतरा अभी 15 दिन तक और रहेगा। इस संकट को देखते हुए सभी कोविड अस्पतालों में नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। इसके अलावा सभी सीएचसी-पीएचसी पर जांचों के लिए अलग से टीमों का गठन किया गया है।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ