बदायूं। कोरोना संक्रमण पर काबू के लिए देश में हुए लॉकडाउन के बाद मुंबई, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान से हजारों की संख्या में मजदूर घरों को लौट चुके हैं। इनमें गिने-चुने मजदूरों का ही स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। बाकी मजदूरों को होम क्वारंटीन की बात कहकर घरों को भेज दिया गया। शासन की ओर से जिले में कम से कम 25 हजार लोगों को क्वारंटीन करने की व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन यहां भी औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। इधर, गांवों में भी सभी घरों में रह रहे हैं या नहीं इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जिले के हजारों की संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद पैदल, साइकिल, बाइक या फिर किन्हीं अन्य माध्यमों से इनके घरों को लौटने का क्रम जारी है। कादरचौक ब्लॉक के गांव बेहटा डंबरनगर में अब तक एक हजार से ज्यादा मजदूर वापस लौट चुके हैं। इनमें ज्यादातर मुंबई से आए हैं। ये मजदूर सामाजिक दूरी और लॉकडाउन के नियमों को तोड़कर घर पहुंचे हैं। अन्य स्थानों का भी यही हाल है। बिसौली, सहसवान, दबतोरी, फैजगंज, ओरछी आदि जगहों पर भी तमाम मजदूर बाहर से यहां आए हैं। इनमें से कुछ को प्रशासन द्वारा बसों से लाया गया है जबकि कुछ पैदल व अन्य साधनों से अपने घरों तक पहुंचे हैं।
मजदूरों पर नहीं रखी जा रही नजर
कादरचौक। मंगलवार और बुधवार को तीन डीसीएम में भरकर 160 मजदूर कादरचौक पहुंच चुके हैं। इससे पहले भी यहां काफी मजदूर आ चुके हैं। इनको औपचारिकता के नाम पर घरों में क्वारंटीन कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण को लेकर मुंबई के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। जिस तरह से इन मजदूरों पर नजर नहीं रखी जा रही। बेहटा डंबरनगर के प्रधान मोहम्मद शफी से होम क्वारंटीन मजदूरों के संबंध में बात करने पर उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। कहा कि वह मजदूरों पर नजर रख रहे हैं, लेकिन नजर किस प्रकार रखी जा रही है, इसका उन्होंने जवाब नहीं दिया।
गांवों में घूमकर समय बिता रहे क्वारंटीन मजदूर
कादरचौक। ब्लॉक के गांव असरासी, चौड़ेरा, नूरपुर, बेहटा डंबरनगर के मुंबई से लौटे मजदूरों में ज्यादातर होम क्वारंटीन का पालन नहीं कर रहे। मजदूर घरों के बाहर घूम रहे हैं। पाकड़, पीपल के नीचे चौपालों में बैठकर मुंबई के हालात और अपनी व्यथा सुना रहे हैं। होम क्वारंटीन के नाम पर ऑपचारिकता पूरी करने के बाद मजदूरों की कोई सुध नहीं ली जा रही। गौर करने वाली बात यह है कि इनके घरों के बाहर होम क्वारंटीन संबंधी नोटिस भी चस्पा नहीं किए गए हैं।
निष्क्रिय हो गई गांवों में बनी कोरोना योद्धाओं की टीमें
पुलिस ने कोरोना संक्रमण पर काबू के लिए गांव-गांव 10-10 संभ्रांत ग्रामीणों की टीमों का गठन किया था। लॉकडाउन-02 से पहले बनाई गईं इन टीमों को कोरोना योद्घा नाम दिया गया। इन टीमों पर गांव में लोगों को कोरोना को लेकर ग्रामीणों को जागरूक कराना, लॉकडाउन, सामाजिक दूरी का पालन कराना और दूसरे राज्यों से लौटने वाले लोगों के बारे में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को जानकारी देना था। कोरोना योद्धाओं की यह टीमें भी पूरी तरह से निष्क्रिय हो गई है।
बन गए क्वारंटीन सेंटर, यहां दिखता नहीं कोई
बदायूं। शहर में बने क्वारंटीन सेंटरों में भले ही बाहर से आने वाले मजदूरों को रखा गया हो लेकिन कस्बों देहातों में बने क्वारंटीन सेंटरों का हाल बेहाल ही है। यहां बाहर से आया कोई मजदूर दिखाई नहीं देता। अधिकांश सेंटर खाली पड़े हैं तथा मजदूरों को उनके घरों में औपचारिकता के लिए क्वारंटीन कर दिया गया है।
उसावां : सेंटर में तीन मई से कोई क्वारंटीन नहीं
उसावां। कस्बे में बने क्वांरटीन सेंटर पर तीन मई के बाद से किसी को क्वारंटाइन नहीं किया गया है। 21 व 26 अप्रैल तक 34 लोगों को क्वांरटीन सेंटर पर रखा गया था, जिन्हें अधिकारियों की मौजूदगी में तीन मई की शाम को रोडवेज बसों से उनके घर भेज दिया गया था, अब यहां केवल देखभाल करने वाले व लेखपाल ही हैं ।
दबतोरी : 22 लोग महाराष्ट्र से आए, घर भेजा गया
दबतोरी। क्षेत्र के हर गांव के सरकारी स्कूल को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है लेकिन अभी तक बाहर से आने बाले किसी व्यक्ति को इसमें नहीं ठहराया गया है बीधानगला सरकारी प्राइमरी स्कूल में आठ दिन पहले झांसी से तीन मजदूर लौटे और जांच कराकर स्कूल में तीन दिन तक रुके लेकिन स्कूल में बेड और खाने की व्यवस्था नहीं होने पर घर लौट गए। गुरुवार को महाराष्ट्र से दो मिनी बसों में भरकर 22 लोग क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव लौटे, लेकिन डाक्टरों की सलाह को दरकिनार कर अपने घरों में रहने लगे।
इस्लामनगर : केरल से आए 14, होम क्वारंटीन
इस्लामनगर। आठ मई को 42 लोगों को 14 दिन क्वारंटीन के बाद उनके घर भेज दिया था। इस समय एक बरातघर में बना क्वारंटीन सेंटर खाली है। ट्रेन से केरल से आए 14 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच के बाद उनके घर पर ही क्वारंटीन किया गया है।
बिल्सी। नगर क्षेत्र में सीएचसी, रंजना अस्पताल, भूदेवी इंटर कॉलेज एवं महेश बाल इंटर कॉलेज की क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था, लेकिन अभी किसी में कोई भी व्यक्ति क्वारंटीन नहीं है।
अलापुर : 91 को घर में किया क्वारंटीन
अलापुर। पॉलिटेक्निक कॉलेज में 25 अप्रैल को बाहर से आए 91 लोगों को क्वारंटीन किया गया था। पांच मई को रोडवेज बस द्वारा सभी को अपने अपने घर को भेज दिया गया। अभी तक कालेज में कोई भी क्वारंटीन नही किया गया है।