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कोरोना लॉकडाउनः सड़कों पर नजर नहीं आए, पर गली मुहल्लों में झुंड लगाए

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बदायूं। देश और दुनिया में कोरोना वायरस से होने वाली मौत और मरीजों की बढ़ती संख्या से साफ है कि इस महामारी से निपटने की चुनौती कितनी बड़ी है। फिर जिले में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अनजान बनकर इस खतरे को मोल लेने पर तुले हैं, और बेवजह सड़कों पर निकलकर पुलिस-प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं कि सख्ती और बढ़ाई जाए। जिले में लॉकडाउन के पहले दिन कुछ लोगों ने बेवजह सड़कों पर घूमने की कोशिश की, जो सड़कों पर नहीं निकले वे गली-मोहल्लों में अपने घरों के आसपास झुंड लगाए रहे। शहर में कई जगह आम दिनों जैसा माहौल दिखा।
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रविवार को जनता कर्फ्यू के एक दिन बाद मंगलवार रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी, जो बुधवार को लागू हो गया। बुधवार को सड़कों पर तो लोगों की ज्यादा आवाजाही तो नहीं रही, लेकिन गली मोहल्लों में लोग बेवजह झुंड लगाकर चर्चाएं करते रहे। कोरोना वाइरस के कहर से बचने के लिए लोगों से आपस में दूरी बनाने को कहा जा रहा है, लेकिन मोहल्लों मेें लोग घरों के बाहर बैठकर पंचायत करते दिखाई दिए। बच्चे कहीं क्रिकेट खेलते रहे तो कहीं दुकानों के बाहर बैठे दिखे। सड़कों और चौराहों पर पुलिस की सख्ती दिखाई दी। बेवजह घरों से निकले लोगों को पुलिस ने पूछताछ करने के बाद लौटा दिया। चौराहों पर तैनात पुलिस कर्मियों ने निकलने वालों से पूछताछ की। इस दौरान आवश्यक सेवाओं जैसे दूध, गैस सिलिंडर, सब्जी आदि देने वाले लोग सड़कों पर निकलते रहे।
शहवाजपुर चौराहा
बरेली-मथुरा रोड पर स्थित शहवाजपुर शहर का अतिव्यस्ततम चौराहा माना जाता है। आम दिनों में इस चौराहे को पार करने में कभी कभी काफी देर खड़ा रहना पड़ता है, लेकिन बुधवार को लॉकडाउन होने से यह चौराहा पूरी तरह सूना नजर आया। बीच-बीच में गैस एजेंसी हॉकर और दूध वाले आते जाते दिखे। चौराहे के आसपास कुछ लोग बच्चों के साथ घरों के बाहर बैठे थे। कुछ बच्चे क्रिकेट खेलने में मस्त थे। वहीं पास ही मौजूद पुलिस वालों की नजर इन पर नहीं पड़ी।
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सुभाष चौक
शहर के बीच स्थित सुभाष चौक से पुराना बाजार, आर्यसमाज, पनवड़िया, रजीचौक आदि जगहों के लिए रास्ते जाते हैं। यहां मिठाई, किराना समेत रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों की दुकानें मौजूद हैं। आम दिनों में भीड़ से भरे रहने वाले इस चौराहे पर बुधवार को दो पुलिसकर्मी दिखाई दिए। चौराहे पर एक-दो लोग गुजरे, लेकिन पुलिस वालों ने उन्हें पूछताछ के बाद ही जाने दिया।
लावेला चौक
लावेला चौक पर ज्यादातर मेडिकल स्टोर हैं। पास ही रोडवेज बस स्टैंड है। यहां लोगों को आने जाने से रोकने के लिए बैरियर लगाने के साथ पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। बुधवार दोपहर स्कूटी पर सवार दो लोगों को पुलिस ने रोका। एक युवक ने बताया कि उसे कुत्ते ने काट लिया है, जिसके लिए दवा लेने जा रहे हैं। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें जाने दिया। कुछ लोग अनावश्यक घूमते मिले तो उन पर डंडा फटकारा गया।
टिकटगंज
टिकटगंज वैसे तो भीड़भाड़ वाला इलाका माना जाता है, लेकिन बुधवार को यहां सुनसान दिखाई दी। हालांकि दुकानों और घरों के आगे कुछ लोग बैठे दिखाई दिए। पुलिस की गाड़ी जब यहां से गुजरती तो बाहर बैठे लोग घर के अंदर हो जाते, लेकिन जैसे ही गाड़ी आगे बढ़ती तो लोग फिर बाहर निकलकर पंचायत करने लगते। बच्चे भी चार-पांच का झुंड बनाकर यहां बैठे दिखाई दिए। पुलिस ने लोगों को चेतावनी भी दी, लेकिन उन पर इसका खास असर दिखाई नहीं दिया।
देहात क्षेत्रों में ज्यादा दिखी लापरवाही
शहर की अपेक्षा कस्बों और गांवों के लोग लॉकडाउन के प्रति ज्यादा लापरवाह दिखे। युवाओं पर तो मानों इसका कोई असर ही नहीं हो रहा है। वे इसे अभी भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वजीरंगज, कुंवरगांव, कादचौक आदि इलाकों में युवा और किशोर सड़कों पर घूमते दिखाई दिए।
सड़कों पर मंडराएंगे तो यहां भी कर्फ्यू लगवाएंगे
अमेरिका और इटली में लगातार हो रही मौतों का आंकड़ा बता रहा है कि भारत के सामने कोरोना बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है, लेकिन तमाम लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं। अभी भी लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। बुधवार को भी कुछ लोग सड़कों पर बेवजह निकले, हालांकि पुलिस ने कहीं समझाकर तो कहीं सख्ती दिखाकर इन्हें घर लौटा दिया लेकिन जब तक लोग इसे खुद नहीं समझेंगे, खतरा मंडराता रहेगा। गलियां और मुहल्लों का तो हाल बुरा ही दिखा। कही लोग घरों के बाहर बैठे थे तो कहीं बच्चे झुंड बनाकर बैठे नजर आए। सुबह से शाम तक यही रवैया जारी रहा। अगर आगे भी ऐसा ही रहा तो यहां भी कर्फ्यू लगने जैसी संभावना बन जाएगी।
प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि घर में रहें, बाहरी लोगों के संपर्क में न आएं। फिर चाहे पड़ोसी हो या फिर रिश्तेदार। इसके बावजूद लोग नहीं मान रहे हैं। अगर लोग बाहर एक साथ बैठकर लूडो खेल रहे हैं या फिर क्रिकेट ही खेल रहे हैं, तब भी वही बात हुई। ये दूरी कहां हुई। लोग मान ही नहीं रहे हैं। बच्चे यदि ऐसा कर रहे हैं तो उनके मां-बाप को उन्हें समझाना चाहिए कि वे बाहर न निकलें। किसी के पास न बैठें, मास्क लगाकर रखें। ज्यादा लोगों के संपर्क में आएंगे तो उनके लिए खतरा हो सकता है।
- डॉ. अमित वार्ष्णेय, वरिष्ठ चिकित्सक जिला अस्पताल
गैस, दूध व अन्य जरूरी चीजों की होती रही आपूर्ति
लॉकडाउन की घोषणा होते ही शासन और प्रशासन ने आवश्यक चीजों की कमी न होने देने का एलान किया था, जिसका असर भी दिखाई दिया। इस दौरान सड़कों पर रसोई गैस हॉकर, दूध वाले, सब्जी वालों आदि को नहीं रोका गया, जिन्होंने जरूरतमंदों के घर जाकर इन चीजों की आपूर्ति की।
घरों की खिड़कियों से झांकते रहे लोग
लॉकडाउन के कारण जहां सड़कों पर सूनसान दिखाई दी वहीं जिन लोगों के घर सड़कों पर थे, वे खिड़कियों से झांककर माहौल का जायजा लेते रहे। लोग यह भी देख रहे थे कि सड़कों पर कितने लोग निकल रहे हैं। हालांकि कुछ लोगों ने बाहर आकर भी माहौल देखने की कोशिश की तो वहां तैनात पुलिस कर्मियों ने उन्हें अंदर भेज दिया।
घरों के बाहर लिखकर टांगा- ‘डोंट डिस्टर्ब-स्टे होम, सेव लाइफ’
जो लोग कोरोना की भयावहता समझ रहे हैं, उन्होंने खुद को और अपने परिवार को घरों में कैद कर लिया है। इन लोगों ने आसपास रहने वाले और बाहरी लोगों के घर में आने पर पाबंदी लगा दी है। कुछ लोगों ने घरों के बाहर ‘डोंट डिस्टर्ब-स्टे होम, सेव लाइफ’ लिखकर चस्पा कर दिया है। मतलब साफ है कि घरों पर भी एक दूसरे से संपर्क करने बेवजह न आए। घर पर रहें, सुरक्षित रहें।
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