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मेडिकल कॉलेज का निर्माण अधूरा : 150 किलोमीटर दूर सैफई भेजे जा रहे मरीज

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बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के निर्माण को शुरू हुए छह साल से ज्यादा वक्त बीत गया है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को सैफई, अलीगढ़ और लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। प्राचार्य ने बताया कि विवाद के कारण तीन साल से निर्माण अटका हुआ था। जब कोर्ट ने दखल दिया तो तय हुआ कि जनवरी 2024 से निर्माण कार्य शुरू होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगर कार्य पूरा न हुआ तो मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर भी संकट आ सकता है।
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उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के मुख्य ठेकेदार दरवान सिंह राना ने बताया कि निगम द्वारा अनिल कुमार एंड कंपनी को निर्माण कार्य का ठेका दिया गया था। अनिल कुमार ने लापरवाही बरतते हुए निर्माण कार्य में शिथिलता बरती, जिस पर उनका भुगतान रोका गया था। भुगतान को लेकर अनिल कुमार एंड कंपनी ने कोर्ट का सहारा लिया और वाद दायर कर दिया था। अब मामला निपट गया है। जल्द निर्माण कार्य शुरू होगा। यहां बता दें कि राजकीय मेडिकल कॉलेज की मंजूरी सन 2012 में मिली थी। जमीन खरीदने का काम 2013 में शुरू हुआ। 6.45 करोड़ रुपये मिलने के बाद 2015 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। 2017 से निर्माण कार्य रुका हुआ हैै।

दूसरी जगह ले जाते समय अक्सर मरीजों की थम जाती हैं सांसें
निर्माण कार्य पूरा न होने से राजकीय मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं चौपट हो गईं हैं। यहां से सौ में से 80 मरीजों को अलीगढ़, सैफई और लखनऊ रेफर किया जा रहा है। दो सौ किलोमीटर तक जाते-जाते मरीज अक्सर दम तोड़ देते हैं। बिल्सी निवासी राजेश 58 वर्ष पुत्र भगवती प्रसाद को पांच मार्च को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। प्रथम उपचार के बाद उन्हें सेफई रेफर किया गया। सैफई पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। उन्हें पेशाब में दिक्कत थी।
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वहीं जरीफनगर निवासी दिनेश यादव (63) पुत्र रमेश यादव को 29 फरवरी को ब्रेन हेमरेज होने पर भर्ती कराया गया था। दो दिन उपचार के बाद अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। रास्ते में ही दिनेश की मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज में उपचार के नाम पर खानापूर्ति ही कि जाती है। यहां सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है।

कोरोना काम में प्रभावित हुआ निर्माण कार्य
उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने अनिल कुमार एंड कंपनी को निर्माण कार्य का ठेका दिया गया था। कोरोना काल में कंपनी का निर्माण प्रभावित हुआ। इधर भुगतान नहीं मिला। निर्माण निगम ने दबाव बनाया तो कंपनी आर्बिटेशन में चली गई। आर्बिटेशन में कंपनी के पक्ष में आदेश हुआ तो निर्माण कामर्शियल कोर्ट लखनऊ में अपील कर दी। नतीजा विवाद निबटा नहीं, लेकिन जब स्थानीय डीएम और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने विद्यार्थियों और मरीजों के हित का हवाला दिया तो जनवरी से निर्माण का आदेश मिल गया।

तय लागत में निर्माण पूरा करने की मांगी गई है अनुमति
वैसे तो जनवरी में निर्माण शुरू करने के लिए कोर्ट से रास्ता मिल गया था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। राजकीय निर्माण निगम के महाप्रबंधक दीवान सिंह का कहना है कि प्रक्रिया चल रही है। स्वास्थ्य महानिदेशालय में उन्होंने प्रस्ताव भेजा है। कुछ कार्यों में कटौती करके तय लागत में ही काम कराने की अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही काम शुरू होगा। निर्माण कार्य रुका होने से कॉलेज परिसर में गंदगी के अंबार लगे हैं। कॉलेज प्राचार्य अपने स्तर से कैंपस की सफाई करा रहे हैं, लेकिन निर्माणाधीन बिल्डिंग में गंदगी से छात्र-छात्राओं समेत स्टाफ को भी परेशानी हो रही है। वहीं कॉलेज की चहारदीवारी न होने से विषैले जीव-जंतु परिसर में घूमते रहते हैं।

यह कार्य अभी बाकी

- राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो लेक्चर रूम का निर्माण।
- शौचालय में एसटीपी का कार्य अधूरा होने से सभी शौचालय बंद हैं। गंदगी फैली हुई है।
- मल्टी परपज हॉल, लेक्चर थियेटर, खिड़कियां और फाल्स सीलिंग।
- 12 लिफ्ट में एक संचालित बाकी लगना शेष। टावर चार और पांच अधूरे पड़े हैं।

- ऑपरेशन थियेटर कुल दस बनने हैं। 430 बैड में 303 बाकी।
- एसटीपी प्लांट क्रियाशील नहीं है, जिससे मरीजों को असुविधा, गंदगी और एनजीटी से जुर्माना लगने का खतरा रहता है।

निर्माण के मामले में हम ठेकेदार को नहीं जानते। हमें तो उत्तर प्रदेश निर्माण निगम से मतलब है। लगातार शासन को डीएम के माध्यम से व खुद छात्र-छात्राओं के भविष्य का हवाला देकर पत्राचार किया तब कहीं जाकर निर्माण जनवरी से शुरू करने की बात कही गई। हालांकि अब तक कार्य शुरू नहीं कराया है। शासन को लिखकर भेजा गया है। - डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूं
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