रविवार को रेलवे स्टेशन परिसर में निर्माणाधीन प्याऊ का स्लैब गिरने से हुई मजदूर की मौत के मामले में लीपापोती शुरू हो गई है। रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर जांच को मौके पर पहुंचे लेकिन उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गौर करने की बजाय मिस्त्री समेत मजदूरों की लापरवाही उजागर कर दी। जांच में उन्होंने गुणवत्ता बेहतर ठहरा कर ठीकरा मृत मजूदर के सिर पर ही फोड़ दिया है।
हादसे के बाद शाम को रेलवे स्टेशन पर पहुंचे सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने हालांकि स्टेशन कर्मियों से कोई जानकारी हासिल नहीं की लेकिन निर्माणाधीन प्याऊ की गुणवत्ता देखी। जमीन पर पड़े स्लैब को भी उन्होंने मजदूरों से हटवाया। करीब एक घंटा तक स्थलीय जांच के दौरान सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने चश्मदीदों से बात कर उन्हें बताया कि निर्माण सामग्री मानक के अनुरूप है। उनकी मानें तो हादसे से एक दिन पहले ही स्लैब का बनाया गया था। प्लास्टर करते वक्त मजूदरों ने स्लैब के नीचे से सपोर्ट हटाकर लापरवाही कर दी थी। ऐसे में रेलवे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
सीनियर सेक्शन इंजीनियर को मौके पर निर्माणाधीन सामग्री में खामियां क्यों नजर नहीं आई, इस पर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारों की मानें तो खुद और ठेकेदार को बचाने के लिए ही पूरे मामले में लीपापोती शुरू की गई है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता परखने की जिम्मेदारी सेक्शन इंजीनियर और सीनियर सेक्शन इंजीनियर की बनती है, ऐसे में वह अधीनस्थ को भी दोषी नहीं ठहरा सकते। निर्माण कार्य के मानक की असलियत सामने आने पर विभागीय अफसरों की किरकिरी भी हो सकती है।
बता दें कि रविवार पूर्वाह्न में प्याऊ का निर्माणाधीन स्लैब गिर जाने से कासगंज में दऊआपुर निवासी 45 वर्षीय मजदूर चरन सिंह की मौत हो गई थी। मजूदर के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद घरवाले शव अपने साथ दऊआपुर ले गए थे। मजूदर को दैनिक मेहनताना तय कर ठेकेदार राजीव शर्मा लाया था। ठेकेदार राजीव ने बताया कि वह आउट ऑफ स्टेशन होने की वजह से मृत मजूदर के घर नहीं पहुंच पाया है। उधर, जीआरपी ने भी हादसा मानकर आगे की कार्रवाई करने से इंकार कर दिया है। कार्रवाई को लेकर मृतक के घरवाले रविवार शाम को ही जीआरपी के दरोगा से मिले थे।
दूसरे दिन भी ठप रहा निर्माण कार्य
उझानी। निर्माणाधीन प्याऊ गिरने से मजदूर चरन सिंह की मौत के बाद से काम करने वाले मजूदर अपने गांव चले गए हैं। काम शुरू कराने के लिए ठेेकेदार ने अपने कारिंदों को भेजकर मजूदरों से बात भी कराई लेकिन मिस्त्री सुम्मेर सिंह समेत उसका साथी संजय नहीं पहुंचा। इसी के चलते दूसरे दिन भी निर्माणाधीन प्याऊ का काम ठप रहा।