बदायूं। पुल के टेंडर में हेराफेरी के आरोपी लोक निर्माण विभाग के छह अभियंता और ठेकेदार लोकायुक्त की जांच में दोषी पाए गए हैं। उसके बाद भी कार्रवाई न होने पर पीड़ित ठेकेदार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अब हाईकोर्ट के आदेश पर सीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया है।
पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन मुख्य अभियंता व अधीक्षण अभियंता देवेंद्र कुमार मिश्रा, अधिशासी अभियंता अनिल राणा और हरस्वरूप सिंह ने वर्ष 2020 में पुल निर्माण के लिए 5.14 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला था। इसमें बरेली के ठेकेदार जावेद और बदायूं के नेकपुर के ठेकेदार सतीश चंद्र दीक्षित ने टेंडर डाले। आरोप है कि अभियंताओं ने कागजों में हेराफेरी कर ठेका जावेद को दे दिया। इस दौरान मुख्य अभियंता रिटायर हो गए। इसके बाद मुख्य अभियंता का चार्ज निसार को मिला।
अधिशासी अभियंता हेमंत सिंह ने टेंडर के अनुभव की जांच की तो सतीश के अनुभव प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया। इसके बाद ठेकेदार सतीश ने लोकायुक्त में शिकायत की, वहां की जांच में छह अभियंता दोषी पाए गए थे। इन पर कार्रवाई न होने पर सतीश ने मई 2024 में सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की तो उसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद जिला कोर्ट में भी प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया। इस पर वह हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने 24 जुलाई को सीजेएम कोर्ट को परिवाद दाखिल कर सुनवाई करने का आदेश दिया।