बदायूं। जिले में 181 डाॅक्टर की जरूरत है, जबकि मौजूद 73 ही हैं। जिले में 61 सीएचसी और पीएचसी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए 108 डाॅक्टर और चाहिए। इन 73 डाॅक्टरों में भी रोजाना कुछ ट्रेनिंग पर तो कुछ वीआईपी व पोस्टमाॅर्टम ड्यूटी पर रहते हैं। ऐसे में जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महज एक डाॅक्टर या फिर आयुष के डाॅक्टरों के हवाले रह जाते हैं। आंकड़ों से समझा जा सकता है कि मरीजों को इन स्वास्थ्य केंद्रों पर कैसा इलाज मिल रहा होगा।
जिले में 16 सीएचसी, 45 पीएचसी हैं। इसी के साथ ही छह नगरीय स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। इन अस्पतालों में 181 एमबीबीएस डॉक्टराें की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन मात्र 73 डॉक्टरों से ही काम चलाया जा रहा है। अगर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा लगाए गए आयुष डाॅक्टरों की मदद न ली जाए तो मरीजों को देखने वाला भी कोई नहीं।
अधिकांश सीएचसी पर एक एमओआईसी यानी एमबीबीएस डाॅक्टर की तैनाती है। इन 73 डाॅक्टरों में से हर रोज कुछ डॉक्टर पोस्टमाॅर्टम ड्यूटी, वीआईपी ड्यूटी पर भी रहते हैं। इसके अलावा पुराने मुकदमों में गवाही देने भी डाॅक्टरों को जाना होता है। करीब आठ से दस डाॅक्टर इन ड्यूटियों में कम हो जाते हैं। ऐसे में बमुश्किल 73 में से 63 डाॅक्टर ही रह जाते हैं। इनमें भी कुछ डाॅक्टर सरकारी काम से मुख्यालय आदि में आते-जाते रहते हैं। ऐसे स्थिति में सीएचसी पर एक डाॅक्टर बचते हैं। पीएचसी पर आयुष के डाॅक्टर ही मरीजों को देख रहे हैं।
यह है सीएचसी पर स्टाफ का मानक
शासनादेश के अनुसार, एक सीएचसी पर पांच एमबीबीएस डॉक्टर व तीन फार्मासिस्ट की तैनाती होनी चाहिए। साथ ही दो एलटी समेत चार वार्ड बॉय की तैनाती होनी चाहिए। बुधवार को सीएचसी की पड़ताल में सामने आया कि सीएचसी पर भी डॉक्टर नहीं हैं। वहां भी एक या दो डॉक्टरों से ही काम चलाया जा रहा है।
एक डॉक्टर के सहारे चल रही आसफपुर सीएचसी
आसफपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच एमबीबीएस डॉक्टर की जगह मात्र एक एमओआईसी डॉ. हिमांशु कुमार ही हैं। बुधवार को वह सीएचसी पर थे। विभागीय काम में व्यस्त थे। ओपीडी के लिए सीएचसी मन्नूनगर पर तैनात डॉ. ईशान चौधरी को लगाया गया। उन्होंने मरीजों को देखकर दवा दी। अस्पताल पर महिला डॉक्टर न होने से महिलाओं संबंधी इलाज नहीं मिल पा रहा है। तीन फार्मासिस्ट हाेने चाहिए, लेकिन दो की ही तैनाती है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सही लाभ नहीं मिल पा रहा है। संवाद
एमओआईसी ट्रेनिंग पर, बिसौली सीएचसी भी एक डॉक्टर के सहारे
बिसौली। सीएचसी पर दो डॉक्टर तैनात हैं। इनमें एक एमओआईसी डाॅ. ममता शर्मा हैं। बुधवार को पड़ताल के दौरान दूसरे डॉ. मोहित ओपीडी में मरीजों को देखते हुए मिले, जबकि एमओआईसी डाॅ. ममता शर्मा मौजूद नहीं थीं। बताया कि जिला स्तर पर कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम है, उसमें शामिल होने गईं हैं। यहां हर रोज तीन से चार सौ मरीज पहुंचते हैं। मरीजों का इलाज आयुष चिकित्सकों के हवाले रहता है। संवाद
दहगवां सीएचसी पर दंत रोग विशेषज्ञ देखते हैं मरीजों को
दहगवां। यहां सीएचसी पर पांच डॉक्टरों में मात्र दो डॉक्टरों की ही तैनाती है। इनमें पीयूष यादव एमओआईसी हैं। दूसरे दंत रोग विशेषज्ञ राजेश कुमार हैं। दंत रोग विशेषज्ञ ही मरीजों को देख रहे थे। बताया गया कि एमओआईसी सरकारी काम से जिला मुख्यालय आए हुए हैं। इसके अलावा यहां सालों से एक भी फार्मासिस्ट नहीं है, जबकि तीन होने चाहिए। अस्पताल में न कोई एक्सरे टेक्नीशियन है और न ही लैब टेक्नीशियन। ऐसे में जो मरीज यहां आते हैं उन्हें महज गोलियां देकर टरका दिया जाता है। संवाद
जिले में डॉक्टरों की कमी है, इसको लेकर हर माह शासन को अवगत कराया जाता है। कई बार डॉक्टरों की तैनाती के लिए साक्षात्कार भी हुए, लेकिन सरकारी सेवा में डॉक्टर आना ही नहीं चाहते। शासन स्तर से ही डॉक्टरों की पूर्ति हो तभी समस्या का समाधान संभव है। - डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
आसफपुर सीएचसी पर मरीज को देखते आयुष डॉक्टर। संवाद- फोटो : kathua news
आसफपुर सीएचसी पर मरीज को देखते आयुष डॉक्टर। संवाद- फोटो : kathua news