सीएमओ डॉ.नेमी चंद्रा ने सोमवार को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एक डॉक्टर समेत तीन कर्मचारी गैरहाजिर मिले। तीनों का मानदेय और वेतन रोकने के साथ ही स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं अक्सर नदारद रहने वाले एक डॉक्टर को प्रशासनिक आधार पर हटा दिया है। सीएमओ ने बाकी अव्यवस्थाओं को दूर किए जाने के चिकित्सा प्रभारी को निर्देश दिए हैं। सीएमओ के निरीक्षण से डॉक्टरों-कर्मचारियों में खलबली मची रही।
यहां के कुछ लोगों ने डीएम से शिकायत की थी कि यहां तैनात डॉ.आशीष बंसल अक्सर गायब रहते हैं। सो डीएम ने सीएमओ को निर्देश दिए कि वह अस्पताल का निरीक्षण करें। डीएम के निर्देश पर ही सोमवार को सीएमओ डॉ.नेमी चंद्रा दोपहर में करीब 12.55 बजे अस्पताल पहुंचे। इस दौरान चिकित्साधिकारी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरती सिंह, संविदा कर्मचारी गौरव यादव, एएनएम सुदेश गुप्ता गैरहाजिर मिलीं। गौरव यादव ने उपस्थिति रजिस्टर में ट्रेनिंग में भाग लेना दर्शाया। प्रभारी चिकित्साधिकारी सीपी आर्या से पूछे जाने पर बताया कि उन्हें नहीं पता कि गौरव यादव किस की ट्रेनिंग लेने गए हैं। सीएमओ ने इसे गंभीरता से लिया। सीएमओ ने बताया कि डॉ.आरती सिंह का वेतन रोकने के साथ ही उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही गौरव यादव और सुदेश गुप्ता का मानदेय रोकने के साथ ही उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। नेत्र सहायक ओपी पाठक और फार्मेसिस्ट राजीव कुमार आकस्मिक अवकाश पर थे। दोनों का प्रार्थना पत्र मौजूद मिला।
सीएमओ ने बताया कि जिनकी शिकायत थी वह डॉ.आशीष बंसल आज मौजूद थे। फिर भी उनका प्रशासनिक आधार पर कटरासआदतगंज पीएचसी पर तबादला कर दिया गया है।
सीएमओ ने अस्पताल के नवनिर्मित भवन का निरीक्षण भी किया। सीएमओ ने बताया कि कार्यदायी संस्था फैक्सपैड के अनुसार कार्य पूरा हो चुका है। मगर खिड़कियों के शीशे टूटे थे। मुख्य दरवाजा नहीं होने की वजह से गांव के लोग अस्पताल परिसर में अपने जानवर आदि बांधते हैं। सो गेट लगवाने के निर्देश दिए गए। विद्युतीकरण और कर्मचारी आवासों का कार्य भी पूरा नहीं हुआ था। उन सभी कार्यों को भी जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए। गंदगी मिलने पर भी सीएमओ ने नाराजगी जताई। उन्होंने चिकित्सा प्रभारी को सभी अव्यवस्थाओं को जल्द दूर कराने के निर्देश दिए। चेताया कि लापरवाह कर्मचारियों-डॉक्टरों को बख्शा नहीं जाएगा।
महिला अस्पताल में गंदगी से बुरा हाल
शहर में स्वच्छता को लेकर चलाई जा रही मुहिम के बाद भी खुद सरकारी महकमे सुधरने को तैयार नही हैं। जिला महिला अस्पताल में गंदगी खुले में डाली जा रही हैं। इससे अस्पताल में संक्रामक बीमारी फैलने का डर है।
सूबे के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री स्वच्छता को लेकर खुद झाड़ू थामकर महकमे को साफ सुथरा रखने का पैगाम दे रहे हैं। वहीं शहर में जिला महिला अस्पताल को साफ रखने के लिए वहां डस्टबिन रखे गए हैं। तब भी कचरे को खुले में डाला जा रहा है। इससे मरीजों में संक्रामक बीमारी फैलने का डर है। गेट के पास डाले जा रहे कचरे से आवारा जानवर भी अस्पताल में डेरा डाले हैं। वहीं इस कचरे की आड़ में लोग दीवारों को पेशाबघर की तरह उपयोग करते हैं, इससे महिला मरीज शर्मसार होती रहती हैं। जबकि अस्पताल को साफ रखने के लिए जगह-जगह सूचना पट पर लगाए गए हैं। फिर भी लोगों के साथ कर्मचारी स्वच्छता को लेकर जिम्मेदार नहीं बन रहे हैं।