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ढांग ढही, कुएं में दबे छह मजदूर, एक की मौत 

Sat, 08 Oct 2016 12:22 AM IST
ब्यूरो/बदायूं
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ढांग ढही, कुएं में दबे छह मजदूर, एक की मौत  
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थाना क्षेत्र के गांव दुगरैया में कुएं से ईंटें निकालते वक्त अचानक छह मजदूरों पर ढांग ढह गई। करीब पांच घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पांच मजदूरों को निकाला गया, इनमें हर प्रसाद नाम के एक मजदूर की मौत हो चुकी थी। घटना शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे हुई। खबर मिलने पर एसडीएम जंगबहादुर यादव, नायब तहसीलदार राधेश्याम शर्मा कानूनगो और लेखपाल के साथ मौके पर पहुंच गए। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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दुगरैया गांव के पुत्तन के खेत पर कुआं है। कुएं से चुनी हुईं ईंटें निकालने के लिए पुत्तन ने तहसील बिसौली थाना कुंवरगांव के कसेर गांव के हर प्रसाद को सात हजार रुपये में ठेका दिया था। शुक्रवार को हर प्रसाद (55) पुत्र भवानी गांव के ही भजन लाल (45) पुत्र राम भरोसे, अशोक (38) पुत्र शिवलाल, वीरेश (35) पुत्र चोबे लाल, प्रकाश (30) पुत्र रामकिशन, नंदराम (40) पुत्र नन्नकू के साथ दुगरैया आया था। इन लोगों ने कुएं से ईंटें निकालनी शुरू कर दीं। सभी लोग मिलकर काफी ईंटें निकाल भी चुके थे। 
दोपहर करीब ढाई बजे अचानक ईंटों के साथ मिट्टी की ढांग ढह गई। इसमें सभी छह मजदूर कुएं में दब गए। खेतों पर काम कर रहे लोगों ने खबर पुलिस को दी। एसआई लोकेंद्र सिंह जेसीबी के साथ मौके पर पहुंच गए। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। पांच घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भजनलाल, अशोक, वीरेश, प्रकाश और नंदराम को जीवित निकाल लिया गया। सभी को एंबुलेंस से अस्पताल भेज दिया गया। शाम को करीब 7:40 बजे तीस फीट गहराई में दबे हरप्रसाद को निकाला गया। उसको भी जिला अस्पताल भेजा गया। यहां डॉक्टर ने हरप्रसाद को मृत घोषित कर दिया। 
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सिर्फ सात हजार में दांव पर लगा दीं छह जिंदगियां
कुंवरगांव। गरीबी और बेरोजगारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कसेर गांव के छह मजदूरों ने सिर्फ सात हजार रुपये में कुएं में 30 फीट तक चुनी हुई ईंटों को निकालने का ठेका ले लिया। सभी लोग मिलकर काफी काम भी निपटा चुके थे। अचानक ढांग ढह गई।
सभी मजदूरों के परिवार बेहद गरीब हैं। मृतक हरप्रसाद के तीन बेटियां और दो बेटे हैं। इनमें वह दो बेटों और एक बेटी की शादी कर चुका है। एक बेटा सुनील (18) और बेटी निशा (15) अविवाहित हैं। परिवार का पूरा खर्चा आठ बीघा जमीन और मेहनत मजदूरी पर ही निर्भर था। बाकी के मजदूरों भजनलाल, अशोक, वीरेश, प्रकाश और नंदराम की आर्थिक स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है। उनके परिवार के सामने इलाज कराना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। 
समय से रेस्क्यू ऑपरेशन ने बचा लीं पांच जिंदगियां
कुंवरगांव। हादसे के बाद पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की सक्रियता बेहद काम आई। अगर समय से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं किया जाता तो मरने वालों की संख्या बढ़ सकती थी। समय से रेस्क्यू ऑपरेशन की वजह से ही पांच जिदंगियों को बचा लिया गया। हालांकि, पुलिस-प्रशासन हरप्रसाद की जान बचाने में कामयाब नहीं हो सका। 
समय से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया था। पांच लोगों को जीवित बचा लिया गया। मृतक हरप्रसाद का गांव बिसौली तहसील में है। उसे आर्थिक सहायता दिलाने के लिए बिसौली तहसील से ही प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हम अपनी रिपोर्ट बिसौली तहसील को भेज देंगे।
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-जंगबहादुर यादव, एसडीएम बिसौली
 
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