बदायूं। जिले में अभी गेहूं कटाई जोरों पर हैं, ऐसे में मौजूदा समय में किसानों के पास पर्याप्त मात्रा में भूसा है। कई जगह तो किसानों के पास इसे रखने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं है। इसका फायदा उठाते हुए भूसा व्यापारियों ने किसानों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। वे सस्ते दामों में किसानों से भूसा खरीदकर उसे दूसरे प्रदेशों में सप्लाई कर रहे हैं। ऐसे में पिछले साल की तरह आने वाले दिनों में जिले में भूसे का संकट बढ़ने का खतरा है। प्रशासनिक स्तर से अब तक इसकी निगरानी भी नहीं की जा रही।
रबी का सीजन समाप्ति की ओर है। ऐसे में गेहूं की कटाई में तेजी आ गई है। खेतों में जगह-जगह भूसे के ढेर लगे हुए हैं। किसान इस भूसे को अपने घर ले जा पाएं, उससे पहले ही भूसा व्यापारियों ने किसानों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। कुछ किसानों के पास ज्यादा भूसा रखने के लिए जगह का अभाव है तो कुछ के सामने आर्थिक दिक्कतें हैं। ऐसे में किसान खेत से ही व्यापारियों को भूसा बेचना मुफीद मान रहे हैं। ऐसे में भूसा व्यापारी सस्ते में भूसा खरीदकर दिल्ली, हरियाणा व अन्य प्रांतों को बड़े ट्रकों में भरकर भेज रहे हैं। यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में भूसे का संकट खड़ा हो सकता है।
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शुरू में पांच सौ फिर दो हजार तक पहुंचा था भाव
पिछले साल रबी के सीजन में भूसा पांच से छह सौ रुपये प्रति क्विंटल था। लगभग छह माह भूसे का भाव छह सौ रुपये ही रहा। दिवाली से भूसे के भाव में इजाफा होने लगा। दीवाली पर भूसा एक हजार रुपये प्रति क्विंटल और फिर होली के समय यह 19 सौ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल फुटकर में बिकने लगा था।
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अभी नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल है भाव
इस साल नया भूसा बाजार में आ चुका है। व्यापारियों के अनुसार अभी बाजार में साढ़े आठ और नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल भूसे का भाव है। जिस हिसाब से भूसा जिले से बाहर जा रहा है, उससे आने वाले दिनों में भूसे की दिक्कत हो सकती है। यानि आने वाले दिनों में भूसा दो हजार प्रति क्विंटल के पुराने रेट को पार कर सकता है। ऐसा हुआ तो दूध और इससे बनने वाले पदार्थ भी रिकार्ड महंगे होकर आम आदमी से दूर हो जाएंगे।
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एक लाख हेक्टयेर से ज्यादा हुई गेहूं की फसल
जिले में इस बार गेहूं की पैदावार लगभग एक लाख 15 हजार हेक्टयर जमीन पर हुई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार गेहूं की पैदावार ठीक हुई है। एक बीघा में तीन से चार क्विंटल गेहूं औसतन निकला है। इस लिहाज से जिले में करीब 13 से 14 लाख क्विंटल भूसे का उत्पादन होने की उम्मीद है।
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जिले में पौने 14 लाख पशु खाते हैं भूसा
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में इस बार 11 लाख सात हजार 170 महिषवंशीय और दो लाख 79 लाख 790 गोवंशीय पशु हैं। औसतन एक पशु प्रतिदिन आठ से 10 किलो भूसा खाता है, ऐसे में 140 लाख किलो भूसा प्रतिदिन यहां पशु खाते हैं। ये औसत देखा जाए तो भी जिले में मुश्किल से तीन महीने तक के लिए भूसे का भंडारण है, हालांकि पशु केवल भूसा ही नहीं बल्कि हरा चारा व खल भी खाते हैं जिससे दिक्कत नहीं आती।
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अधिकारियों को चाहिए कि जिस तरह शाहजहांपुर में डीएम ने भूसा अन्य जिलों में भेजने पर रोक लगा दी है। उसी तरह जिले में भी नियम बनाया जाए ताकि जिले के किसानों को आने वाले समय में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
-रामबेटी, पशुपालक
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अभी फुटकर में भूसा नौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है। अगर जिले से भूसा यूं ही अन्य जिलों में जाता रहा तो आने वाले दिनों में भूसे के रेट बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं।
- मोहित, भूसे के फुटकर विक्रेता
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जिले में हर बार गेहूं का उत्पादन औसतन हुआ है। ऐसे में जिले में पर्याप्त मात्रा में भूसा रहेगा। फिलहाल भूसा जिले से बाहर जाने की जानकारी नहीं है।
-रामवीर कटारा, उप निदेशक कृषि