बिसौली एसडीएम महिला को राशन कार्ड देते हुए। संवाद
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बदायूं। आसफपुर क्षेत्र के गांव बीधानगला निवासी प्राइमरी स्कूल की रसोइया श्यामकली की दुश्वारियों को लेकर खबर प्रकाशित हुई तो परेशान महिला का दर्द दूर करने की शानदार पहल शुरू हुई। उसे एक साथ कई सौगातें मिली हैं। एसडीएम बिसौली ने उसे बुलाकर हाथोंहाथ राशनकार्ड बनवाने के साथ ही कई योजनाओं की भी संस्तुति की। कई शिक्षकों ने मदद को चंदा जुटाना शुरू किया है। वहीं कई ग्रामीणों व समाजसेवियों ने उसकी अन्य तरीके से मदद की है।
बीधानगला निवासी श्यामकली गांव के स्कूल की रसोइया हैं। उनके पास झोंपड़ी वाले घर के अलावा कुछ नहीं है। पति की मौत के बाद बेटे की जिम्मेदारी उनके सिर है। वहीं देवर और देवरानी की मौत के बाद उनके दो बच्चों की परवरिश भी वही कर रही हैं। स्कूल के मिडडेमील से परिवार का एक वक्त का गुजारा हो रहा था पर स्कूल बंद होने के बाद भूखे मरने की नौबत आ गई थी।
अमर उजाला ने बुधवार के अंक में श्यामकली और उनके परिवार की दुर्दशा को प्रकाशित किया। खबर पढ़ते ही डीएम दीपा रंजन के निर्देश पर एसडीएम बिसौली ज्योति शर्मा ने श्यामकली को अपने कार्यालय बुलवा लिया। उनके देवर के नाम वाले राशनकार्ड को श्यामकली के नाम जारी करा दिया। साथ ही कई योजनाओं के लाभ दिलाने के लिए बीडीओ आसफपुर, जिला समाज कल्याण अधिकारी, पूर्ति निरीक्षक को पत्र जारी कर संस्तुति की। एसडीएम के स्टेनो समेत कुछ अन्य लोगों ने तहसील परिसर में श्यामकली को कुछ धनराशि और कंबल दिए। वहीं गांव के कई लोगों ने भी राशन व अन्य तरह की मदद दी।
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शिक्षकों ने जुटाया चंदा
बेसिक शिक्षा से जुडे़ लोगों ने भी सोशल मीडिया पर श्यामकली के लिए चंदा जुटाने का अभियान छेड़ दिया है। संबंधित गांव के प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक अवधेश सिंह के खाते में यह ऑनलाइन मदद की धनराशि भेजी जा रही है। बुधवार शाम तक लगभग पांच शिक्षकों ने 8600 रुपये का चंदा जुटा लिया। संवाद