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नरऊ वालों को खाए जा रहा है गंदा तालाब

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उझानी (बदायूं)। कस्बे से सटा नरऊ का तालाब एक ऐसी समस्या बन चुका है, जिसका समाधान खोजने में हुक्मरान से लेकर क्षेत्रीय नुमाइंदे तक कोई खास सफलता अर्जित नहीं कर पाए। तालाब नरऊ वालों को ही नहीं बल्कि पड़ोसी गांव मीहलाल नगला और मलिकपुर के ग्रामीणों को भी परेशानी से उबरने नहीं देता। इसी साल की शुरुआत में तालाब ने भूगर्भ तक असर दिखाकर ग्रामीणों की सेहत को चपेट में लिया तो उनके सामने स्वच्छ पेयजल का संकट पैदा हो गया। विकल्प के तौर पर दूसरे छोर पर फतेहपुर गांव तक पालिका ने अस्थायी नाला खुदवाया, लेकिन पानी आगे बढ़ने की बजाय तालाब में गिरता रहा। इसके बाद स्थायी समाधान के लिए मौके पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण को पालिका ने डीएम के जरिये शासन को डीपीआर बनाकर भेजी जो मंजूरी के लिए शासन स्तर पर फाइलों में कैद है।
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ब्लॉक क्षेत्र के गांव नरऊ की आबादी करीब ढाई हजार है। तालाब में करीब दो दशक से उझानी के नाले का पानी पहुंचता है। वोटर भले ही 12 सौ के करीब हैं, लेकिन उससे सटे गांव मीहलाल नगला और मलिकपुर के ग्रामीणों की कृषि योग्य भूमि तालाब के आसपास है। जनवरी में तालाब के पानी ने भूगर्भ को दूषित किया तो घरेलू हैंडपंपों में गंदा पानी आने लग गया। ग्रामीणों समेत उनके परिजनों को पीलिया ओर पेट की बीमारियों ने जकड़ लिया। बीमार लोगों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई थी। दो-तीन महीना के दौरान महिला और बच्ची समेत चार लोगों की मौत भी हो गई। उसी दौरान पहले डीएम कुमार प्रशांत फिर कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने मौके पर पहुंचकर हकीकत को समझा। नगर पालिका परिषद, जल निगम और राजस्व विभाग के अफसरों का तो महीना भर तक इसी गांव में आना-जाना लगा रहा।
कमिश्नर और डीएम की पहल पर वैकल्पिक समाधान की दिशा में पालिका ने कादरचौक रोड किनारे गांव फतेहपुर की ओर करीब तीन किलोमीटर अस्थायी नाले की खुदाई करा दी। उझानी के नाले के पानी का रुख तालाब की बजाय अस्थायी नाले की तरफ मोड़ा गया तो अस्थायी नाला जवाब दे गया।
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प्रधान के बेटे संजय उर्फ संजू वाल्मीकि ने बताया कि नरऊ के तालाब से फतेहपुर की ओर जमीनी सतह ऊंचाई पर है। इसके बाद ईओ डॉ. डीके राय ने तालाब पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराने के लिए डीएम को प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए डीएम ने शासन को भेज दिया। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण पर एक करोड़ रुपये से अधिक धनराशि की डीपीआर बनी थी।
बता दें कि खासकर बारिश के दिनों में तालाब में उफान आने पर सैकड़ों बीघा फसलें तबाह हो जाती है। गर्मी के दिनों में नाले में घरेलू पानी का डिस्चार्ज अधिक होने पर फसलों को नुकसान होता रहा है। अब तो अफसर भी कहने लगे हैं कि डीपीआर की मंजूरी के बाद धनराशि अवमुक्त होने तक नरऊ वालों को इंतजार ही करना पड़ेगा।
मुफ्त में सिंचाई के लालच में छले गए नरऊ वाले
उझानी। नरऊ निवासी बुजुर्गों की मानें तो करीब दो दशक पहले उझानी के नाले के पानी को कस्बे से बाहर निकास देने की कवायद चल रही थी। पालिका के सामने दो विकल्प थे कि नाले को हजरतगंज के रास्ते अथइया पुलिया तक पहुंचाया जाए या फिर नरऊ के तालाब की ओर उसका रुख कर दिया जाए। उस वक्त नरऊ गांव अढौली ग्राम पंचायत का हिस्सा था। तत्कालीन पालिकाध्यक्ष और गांव के प्रधान के बीच वार्ता भी हुई। ग्रामीणों से कहा गया कि नाले का पानी तालाब तक पहुंचने से इलाके के लोगों के लिए फसलों की सिंचाई मुफ्त में होने लगेगी। फिर क्या, इसी लालच में किसी ने विरोध नहीं किया और नाले के पानी का बहाव नरऊ के तालाब की ओर कर दिया गया।
कमिश्नर कह गए थे.. स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने को नलकूप बनवा दो
उझानी। करीब डेढ़ महीना पहले कमिश्नर रणवीर प्रसाद जब दूसरी बार नरऊ गांव पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने पेयजल को लेकर ज्यादा फोकस किया। डीएम कुमार प्रशांत के साथ जल निगम और पालिका के अफसर भी मौके पर थे। कमिश्नर ने जल निगम के अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया कि जल्द ही भूगर्भ की जांच कराके नलकूप का निर्माण करा दिया जाए। नलकूप पर वाटर टैंक भी रखवा दें। ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल मुहैया हो सके। ग्रामीणों में हरीओम ने बताया कि नलकूप के लिए अभी तक भूमि का चयन भी नहीं किया गया है।
नगर पालिका परिषद समेत जल निगम और बाढ़ खंड के अफसरों ने संयुक्त रूप से विकल्प खोजने के लिए हर स्तर की कवायद की। अस्थायी नाला कोई समाधान नहीं हो सकता। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बन जाने के बाद ही ठोस समाधान सामने आएगा। इसके लिए डीपीआर पर स्वीकृति का इंतजार है।
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- विनय सक्सेना, जेई, नगर पालिका परिषद
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