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बंधुआ मजदूर बनकर रह जाएंगे किसान, हित में नहीं विधेयक

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बदायूं। कृषि क्षेत्र से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयक कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को रविवार को राज्यसभा ने ध्वनिमत मंजूरी दे दी गई। ये विधेयक लोकसभा से पहले ही पारित हो चुके हैं। इस प्रकार इन विधेयकों को संसद की मंजूरी मिल गई है, जिन्हें अब राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाने पर इन्हें अधिसूचित कर दिया जाएगा। कृषि क्षेत्र से जुड़ा तीसरा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 बाद में राज्यसभा मे पेश होगा। केंद्र सरकार जहां इन विधेयकों को किसानों के हित में बता रही है वहीं विपक्षी लगातार इस पर हंगामा कर रहे हैं। कांग्रेस तो इसे डेथ वारंट तक बता डाला है। जिले के किसान नेताओं का भी मानना है कि ये विधेयक किसी तरह किसान हित में नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे किसान भी बंधुआ मजदूर बनकर रह जाएगा।
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देश में किसानों की कोई भी सुनने वाला नहीं है। जहां देखो वहां पर किसानों को दबाने का काम किया जा रहा है। हालात ये है कि किसान लगातार कर्ज में डूबा जा रहा है, लेकिन उनकी तरफ कोई देखने वाला नहीं हैं। बस उसे और दबाने का काम किया जा रहा है। जिन विधेयकों को मंजूरी दी गई है, यह भी उसकी कड़ी में एक हैं। किसानों को जीते जी मारने का काम किया जा रहा है।
-राजेश कुमार सक्सेना, मंडल प्रवक्ता, भाकियू
सरकार केवल निजीकरण को बढ़ावा देने का काम कर रही है। उन्हें किसानों से कोई सरोकार नहीं है। सरकार द्वारा लाए गए विधेयकों से केवल उद्योगपति और पूंजीपतियों को फायदा होगा। अब देश का किसान-किसान नहीं बल्कि बंधुआ मजदूर बनकर रह जाएगा। देश के किसानों के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
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- रामाशंकर शंखधार, जिला महासचिव भाकियू
देश में लोग सरकारी कागजों में लिखने तक स्वतंत्र रह गए हैं, जबकि हकीकत बिल्कुल ही उलट है। अगर हम लोग स्वतंत्र होते तो कोई विधेयक लाने से पूर्व जनमत लिया जाता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। बस चुनिंदा लोगों को कुर्सी पर बैठाकर देश के किसानों का भविष्य तय करने के लिए छोड़ दिया गया है। इसका सभी किसान विरोध करते हैं।
सुरेश गुप्ता, भाकियू नेता
इस काले कानून के खिलाफ सभी किसानों को एकजुट होना होगा। सरकार किसानों के लिए कानून बनाती है और किसानों से ही नही पूछती कि उन्हें क्या चाहिए। अगर सरकार को किसानों की इतनी ही फिक्र है तो स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू क्यों नही करती। कृषि के इन विधेयकों को वापस लिया जाना चाहिए।
- सरताज हुसैन, राष्ट्रीय महासचिव
भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन
मालवीय आवास पर किसानों ने की बैठक, अधिकारियों को दिया ज्ञापन
भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने पारित विधेयकों के विरोध में मालवीय आवास पर बैठक की तथा प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट व सीओ सिटी को सौंपा। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पारित विधेयकों पर पूरे देश के किसान इसके खिलाफ है।
मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने कहा कि मोदी सरकार किसान विरोधी सरकार है, अगर यह कानून लागू किए गए, तो देश का किसान, किसान नहीं रहेगा सिर्फ बंधुआ मजदूर बन कर रह जाएगा। सरकार द्वारा देश की खेती-बाड़ी उद्योगपति और पूंजीपतियों के हवाले करने के लिए कानून लाए गए हैं, जिससे अंग्रेजी शासन की तरह किसानों को गुलाम व गरीब करने वाली योजना लागू की जा रही है। इस काले कानून को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। जिलाध्यक्ष रामचंद्र सिंह यादव ने कहा कि पूरे देशभर का किसान इस काले कानून का प्रबल विरोध कर रहा है। इस मौके पर उमाशंकर शंखधार, चौधरी सौदान सिंह, अमरपाल सिंह यादव, जोगेंद्र सिंह, सुखपाल सिंह, नत्थू लाल, सुरेंद्र सिंह चौधरी आदि मौजूद रहे।
आम आदमी पार्टी ने भी सौंपा ज्ञापन
बदायूं आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम डीआरओ को ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष भूदेव सिंह ने कहा कि संसद में असंवैधानिक तरीके से पारित कृषि अध्यादेश से जय जवान और जय किसान के नारा लगाने वाले देश में किसानों की बदहाली में एक और काला अध्याय जोड़ने का काम केंद्र सरकार द्वारा किया गया है। इस सरकार को किसानों के दुख दर्द से कोई लेना देना नहीं है। हमारे देश में 80 प्रतिशत लोग गांव में रहते हुए कृषि पर निर्भर है। उसको प्राइवेट हाथों में देने का बिल लाया गया हैं। ऐसे में प्राइवेट कंपनी को खुली छूट दे दी है।
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