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धनूपुरा में पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय का निर्माण शुरू

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धनूपुरा गांव में आयोजित कार्यक्रम में बोलते अधिकारी। संवाद - फोटो : BADAUN
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कादरचौक (बदायूं)। कादरचौक ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम धनूपुरा और भोजपुर में अब बदलाव ही नहीं विकास कार्य भी शुरू हो गए हैं। गुरुवार को धनूपुरा पहुंचे कई अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों की योजनाओं के पिटारे खोल दिए। परियोजना अधिकारी अनिल कुमार ने तत्काल प्रभाव से गांव में पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय का निर्माण शुरू करा दिया। जगह की नपत करा दी गई और निर्माण के लिए नींव खुदवाई गई है।
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गुरुवार को ग्राम धनूपुरा और भोजपुर में आयोजित कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी चंद्रशेखर ने ग्रामीणों से कहा कि ये अभियान पुलिस ने शुरू किया है, तो हम भी पूरा सहयोग करेंगे। गांव में विकास की योजनाओं को लाएंगे। परियोजना अधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि गांव में सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवन का निर्माण तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान ही ग्राम पंचायत सचिव और प्रधान को गांव में भेजा। कहा कि अभी जगह की नपत कराएं। तुरंत नींव खुदवाई जाए। उनके साथ अन्य अधिकारियों ने जगह को चिह्नित किया और उस पर नींव खुदवाकर निर्माण की शुरुआत करा दी।
कार्यक्रम में मौजूद मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन ने कहा कि रोजगार की दृष्टि से ग्रामीण पशु पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन भी कर सकते हैं। दुग्ध उत्पादन बढ़ा सकते हैं। इसके लिए बैंक से ऋण स्वीकृत करा सकते हैं, जिससे रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने भी कृषि से संबंधित जानकारियां दीं। तो वहीं सीओ उझानी अनिरुद्ध सिंह ने ग्रामीणों से वादा किया कि पुलिस के सहयोग से जो होगा, वह किया जाएगा। इसके लिए वह पीछे नहीं रहेंगे। उन्होंने जिम्मेदारी उठाई है तो इसे निभाएंगे भी। कार्यक्रम में समाज कल्याण अधिकारी रामजनम, खंड विकास अधिकारी गोपाल प्रसाद कुशवाहा, डीसी मनरेगा, एनआरएलएम ने भी ग्रामीणों को जानकारियां दीं।
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पढ़ानूं साधना नूं, इयां टावरा नूं पालना...
पढ़ानूं साधना नूं, इयां टावरा नूं पालना, टावरा नूं अनपढ़ रैग्या नूं, सरकार माने काऊ साधना नूं...राजस्थानी भाषा की यह लाइनें एक टीस है, जो धनूपुरा और भोजपुर के वाशिंदों के दिल में दबी पड़ी है। टावरा से इनका मतलब उन नौनिहालों से है, जिनकी पढ़ाई-लिखाई और रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था उनके गांव में नहीं है। वर्ष 1902 में राजस्थान छोड़कर आए ये लोग बहुत ही मेहनतकश बताए जाते हैं। ये मूल रूप से राजस्थान में नागौरी जिले के रोहिणी निवासी हैं। बताते हैं कि जब वहां अकाल पड़ा तो ये लोग अपना जिला छोड़कर काम करने निकल पड़े। उन्होंने आगरा से अचनेरा रेलवे लाइन पर मिट्टी डालने का काम किया। कासगंज-बरेली रेलवे लाइन बनने के दौरान उन्होंने गंगा किनारे ततारपुर के पास तंबू डाले थे। कहा जाता है कि उसी समय धनूपुरा-भोजपुर के पोथी और मुरली इनके पास पहुंचे थे और उन्होंने परिवार के मुखिया अर्जुन सिंह से बात की। फिर उन्हें उनके परिवार और अन्य लोगों को यहां ले आए। उन्होंने मेहनत करके इस इलाके की बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाया। पहले डेरे तंबू लगाकर रहे फिर मकान बना लिए। रोजगार से वंचित रहे तो शराब बेचने का धंधा अपना लिया लेकिन आज तक इन्हें जाति प्रमाण नहीं मिला।
छात्राओं को साइकिल, महिलाओं को सिलाई मशीन देंगे सीओ अनिरुद्ध सिंह
धनूपुरा और भोजपुर के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने वाले सीओ अनिरुद्ध सिंह ने दूर दराज पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिल देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वह कम से कम दस छात्राओं को साइकिल देंगे। तो वहीं मेहनतकश दस महिलाओं को सिलाई मशीन देंगे। जिससे वह अपना कोई छोटा मोटा रोजगार कर सकें। इसके अलावा उन्होंने चार खोखे बनवाएं हैं। जिन्हें काम करने में दिक्कत आ रही है। वह भागदौड़ नहीं सकते, उनके लिए खोखा दिए जाएंगे, जिसमें वह अपनी दुकान चला सकेंगे।
ककराला से कादरचौक ट्रांसफर करायें अपने खाते
भोजपुर और धनूपुरा के अधिकतर लोगों के ककराला स्थित बैंकों में खाते खुले हुए हैं। इसके लिए उन्हें ककराला तक भागदौड़ करनी पड़ती है। गुरुवार को गांव पहुंचे अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण ककराला से अपने-अपने खाते कादरचौक बैंक में ट्रांसफर करा लें, जिससे उनकी भागदौड़ बच सके।
बच्चों को आज भी शिक्षा दे रहे 85 साल के नेत्रहीन प्रहलाद
ग्राम धनूपुरा निवासी प्रहलाद सिंह रिटायर अध्यापक हैं। वह अपने जमाने में कक्षा आठ पास करके अध्यापक बने थे। वर्ष 1954 में उनके घर में डकैती पड़ी। फायरिंग की तो उनको गोली लगी, जिसमें उनकी दोनों आंखें चली गई। आज उनकी उम्र 85 साल हो चुकी है। इसके बावजूद गांव के बच्चों को पढ़ाना नहीं भूलते। नेत्रहीन होकर कई बच्चों को शिक्षित किया। उम्र के बढ़ते पढ़ाव से प्रहलाद सिंह काफी कमजोर हो गए हैं।
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