कादरचौक (बदायूं)। कादरचौक के धनूपुरा में अब बदलाव की बयार बहने लगी है। मंगलवार को लोगों ने खुद अपनी शराब की भट्ठियां तोड़ीं। बुधवार को घरों से शराब बनाने के बर्तन निकाल फेंके। गांव की युवा पीढ़ी जाग चुकी है। उनमें इतना जोश दिख रहा है कि अब वह कुछ करना चाहते हैं। पुलिस भी लोगों को समझाने में जुटी है।
धनूपुरा गांव में अब अवैध शराब का धंधा बंद होने की शुरुआत हो गई है। गांव का कोई व्यक्ति न शराब बनाना चाहता है और न बेचना। इसकी वजह पुलिस है, उसी की पहल का परिणाम धनूपुरा गांव में साफ दिखने लगा है। सोमवार को पुलिस ने गांव के लोगों को शराब का धंधा छोड़ने को समझाया तो मंगलवार को उन्होंने अपनी भट्ठियां तोड़ दीं। इसके बाद सीओ उझानी अनिरुद्ध सिंह के निर्देशन में मंगलवार को एसओ ललित भाटी ने गांव पहुंचकर एक पंद्रह सदस्यीय टीम गठित की थी। उनको सम्मानित किया था। इसके बाद टीम ने शाम के समय गांव के हर घर जाकर लोगों को अवैध शराब का धंधा बंद करने को कहा। उन्होंने कहा कि वह रात के अंधेरे में अपने-अपने घर से शराब बनाने के बर्तन और उपकरण सड़क पर रख दें।
बुधवार सुबह लोग सोकर उठे तो गांव की सड़कों पर बर्तन ही बर्तन दिखाई दिए। दोपहर तक गांव के बच्चे बर्तन एकत्र करते रहे। उनका एक ढेर लग गया। अधिकारियों ने वादा किया है कि किसी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इससे लोग खुश हैं। ग्रामीणों को पुलिस की यह बात भी समझ में आई कि अवैध धंधा छोड़ने पर उन्हें रोजगार मुहैया कराया जाएगा।
इस दौरान गांव में सीओ उझानी अनिरुद्ध सिंह, आबकारी इंस्पेक्टर नीरज सिंह, वाणी विनायक मिश्रा और ग्राम विकास अधिकारी आदिल मौजूद रहे। उन्होंने गांव के सभ्रांत नागरिकों के साथ बैठकर सुधार की रणनीति भी बनाई। लोगों को प्रेरित किया, उन्हें शिक्षा और रोजगार से जोड़ा जाएगा।
भोजपुर में ककराला वासियों का प्रवेश वर्जित
जिले की पुलिस ने धनूपुरा और भोजपुर के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए ककराला वासियों का प्रवेश वर्जित कर दिया है। कहते हैं कि गलत संगत का असर आ जाता है। इन गांव में ये गलत संगत का असर ही है, जो यहां के लोग कच्ची शराब, चोरी, डकैती जैसी घटनाओं को अंजाम देने में लग गए। ककराला के लोगों के आने-जाने से यहां वेश्यावृत्ति भी जन्म ले रही थी। लेकिन पुलिस ने इस पर भी विराम लगा दिया है। पुलिस ने अब पूरी तरह से ककराला वासियों का प्रवेश वर्जित कर दिया है। उनकी रोकथाम के लिए गांव की तीनों सड़कों पर बैरियर लगाए जाएंगे, जिससे कोई व्यक्ति नहीं जा सके। वहां हर समय पुलिस तैनात रहेगी। ग्रामीण भी पहरा देंगे।
क्या कहते हैं लोग
हम शहर के डिग्री कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। जब लोग हमारे गांव का नाम सुनते हैं तो घृणा की नजर से देखते हैं लेकिन अब गांव को मान सम्मान मिला है तो कॉलेज में भी लोग सम्मान से देखेंगे। उनका जाति प्रमाण पत्र और बने तो शिक्षा भी सफल हो जाए।
नरेश, धनूपुरा
दिल्ली पुलिस के लिए आवेदन किया था। उसमें नंबर आ गया है। अगर नौकरी लग गई तो वह अपने गांव के लिए कुछ कर सकेगा। इससे उसके गांव का मान सम्मान और बढ़ेगा। जिला प्रशासन इसमें मदद करे तो समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
अजय सिंह, धनूपुरा
कुलदेवी की कृपा से गांव के लोगों का शराब का धंधा बंद हो गया है। वास्तव में ये धंधा बहुत गंदा था। इससे लोग चैन की सांस नहीं ले पा रहे थे। अब ऐसा लग रहा है कि जैसे आजादी मिली हो लेकिन जिला प्रशासन कुछ रोजगार की व्यवस्था करे, जिससे हम अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।
गीता, धनूपुरा
गांव में दर्जनों महिलाएं-पुरुष ऐसे हैं, जिनको विधवा, वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल रही है। पुलिस और जिला प्रशासन ने जब इतना बदलाव किया है तो लोगों की पेंशन भी बनवाएं, जिससे लोगों को चार पैसे मिलते रहें। उनका कुछ खर्चा चल सके।
प्रेमवती, धनूपुरा
धनूपुरा गांव में बदलाव साफ दिखने लगा है। हमने आश्वासन दिया है कि जैसी मदद होगी, वह करेंगे। हम अपने कर्तव्य को निभाने में पीछे नहीं हटेंगे। इस गांव को सहारे की जरूरत थी। अगर पहले मिल गया होता, तो शायद गांव के लोग अपराध से नहीं जुड़ते। वह मुख्यधारा में होते। हम उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने की कोशिश कर रहे हैं। पढ़ाई लिखाई से लेकर जैसी सुविधा होगी, वैसे रोजगार मुहैया कराने का प्रयास किए जाएंगे।
अनिरुद्ध सिंह, सीओ उझानी