बदायूं। इस्लामनगर में स्वास्थ्य विभाग के सरकारी आवास के मलबे में दबे मिले दंपती और उनके बेटे के शव का रविवार को पोस्टमार्टम करा दिया गया। उनके शव 72 घंटे के लिए मोर्चरी में रखे गए थे, जिससे कोई रिश्तेदार या उनकी नजदीक आए और उन्हें अपना बताये लेकिन किसी ने उन्हें अपना होने का दावा नहीं किया। इससे पुलिस ने तीनों शवों को धर्म के अनुसार दफन करा दिया है।
छह अगस्त को इस्लामनगर थाने के पीछे एक स्वास्थ्य विभाग के सरकारी आवास के मलबे में दंपती और उनके बेटे का शव दबा मिला था। इस आवास में स्वास्थ्य केंद्र से रिटायर कर्मचारी सुशील (65), उसकी पत्नी नसीमा (60) और उनका बेटा अनीस (15) रहते थे। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें कई बार नोटिस दिए थे लेकिन उन्होंने सरकारी आवास खाली नहीं किया था। ये आवास काफी जर्जर था। शव मिलने से दो दिन पहले रात को उसकी छत गिर गई थी, जिसमें तीनों लोग दब गए थे। दंपती मोहल्ले के लोगों से ज्यादा मतलब नहीं रखते थे। इससे मोहल्ले वालों ने भी उन्हें देखने की जरूरत नहीं समझी।
छह अगस्त की सुबह मलबे से दुर्गंध आई। तब पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों शव बाहर निकाले थे। उनकी पहचान उसी समय हो गई थी लेकिन किसी ने उन्हें अपना रिश्तेदार या नजदीक नहीं बताया था। इससे पुलिस ने तीनों शव 72 घंटे के लिए पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी में रखवा दिए थे। रविवार शव रखने का समय पूरा हो गया। उसके बाद पुलिस ने तीनों शवों के पोस्टमार्टम जकरा दिए। सुशील इसाई था, जबकि उसकी पत्नी मुस्लिम थी। इससे दंपती और उनके बेटे के शव शहर के एक कब्रिस्तान में दफन किए गए हैं।
तीनों शव 72 घंटे के लिए मोर्चरी में इसलिए रखे गए थे, जिससे उनके परिजन या रिश्तेदार के अपने पर शवों को सौंपा जा सके लेकिन कोई उन्हें अपना बताने नहीं आया है। इससे तीनों शव पोस्टमार्टम के बाद धर्म के अनुसार दफन करा दिए गए हैं।
जसवीर सिंह, इंस्पेक्टर इस्लामनगर