बदायूं। डीएम के निर्देश पर नालों की सफाई को लेकर भले ही नगर पालिका प्रशासन संजीदगी बरतने के दावे कर रहा हो पर नालों से स्थाई अतिक्रमण हटाए बगैर उसका यह अभियान किसी भी हाल में सफल होता नहीं दिखाई दे रहा है। पालिका अधिकारियों की अनदेखी और मिलीभगत के चलते इन स्थाई अतिक्रमणों को कभी हटाया नही जा सका। इसका परिणति जलभराव के रूप में सामने आई जिसे आज शहर की जनता ही भुगत रही है। इतना जरूर है कि अब ये मुसीबत चरम पर पहुंच चुकी है।
मानसून शुरू हो चुका है। नाला सफाई का जो काम मई-जून में खत्म हो जाना चाहिए था, वह अब शुरू हुआ है। उस पर भी अभी अतिक्रमणकारियों को केवल चेतावनी दी जा रही है जबकि चेतावनी का यह क्रम सालों से चल रहा है। आज तक उस पर अमल नहीं हुआ। ऐसे में लोगों का कहना है कि अब केवल चेतावनी देने से काम नहीं चलने वाला। नाले तो तभी साफ हो पाएंगे जब उनके ऊपर हुए स्थायी अतिक्रमण का स्थायी हल निकाला जाएगा।
तभी बारिश में जलभराव से मुक्ति मिलेगी। गौरतलब है कि इस बार डीएम कुमार प्रशांत ने इस दिशा में पहल करते हुए नाला सफाई का काम अपनी निगरानी में ले लिया। ऐसे में उन लोगों की दाल नहीं गल रही जिन्होंने आज तक सफाई के नाम पर केवल गोलमाल किया।
पालिका प्रशासन ने नहीं तो किसने कराए कब्जे, क्यों होती रही अनदेखी
वैसे तो नगर पालिका प्रशासन द्वारा अवैध कब्जों के खिलाफ लगातार कागजों पर कार्रवाई चलती रहती है। पर जमीनी स्तर पर यह कहीं दिखाई नहीं देता। वहीं पालिका प्रशासन इस बात से इनकार करता है कि उसकी इन कब्जों को लेकर कोई साठगांठ रही पर यदि उसके अधिकारियों ने सहयोग नहीं किया तो फिर इतने बड़े पैमाने पर नालों पर अतिक्रमण कैसे हुए।
पनवाड़ी में घर, दुकान, शोरूम सभी नाले पर
पनवाड़ी स्थित विद्युत उपकेंद्र के सामने बड़ा नाला है। ये नाला इतना चोक है कि अब नाले के ऊपर पड़ी गंदगी जमकर ठोस हो चुकी है। नाले के बराबर ही कुम्हारों के घर हैं। यहां पर नाले के ऊपर ही कुछ घरों के चबूतरे, एक कपड़े बेचने वाले का शोरूम और घर समेत कई दुकानें बनी हैं। इस कारण यहां आज तक तलीझाड़ सफाई नहीं हो सकी और हर साल केवल सड़क पर ही नहीं विद्युत उपकेंद्र के भीतर तक घुटनों तक पानी भर जाता है।
लावेला पर तो पूरी की पूरी बिल्डिंग बनी नाले पर
लावेला चौक शहर का व्यस्ततम चौराहा माना जाता है। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, रजिस्ट्री, कचहरी, मुख्य डाकघर आदि जगहों पर जाने का यह मुख्य रास्ता है लेकिन यहां अतिक्रमण के हाल ये हैं कि दुकानों के चबूतरे तो दूर बल्कि पूरी की पूरी बिल्डिंग ही नालों पर बनी हैं। इसकी वजह से आज तक नालों की सफाई नहीं हो पाई। इन भवनों के नीचे दुकानें बनी हैं और वे भी नाले पर हैं। रोजाना हर अधिकारी की गाड़ी यहां से गुजरती है लेकिन आज तक किसी ने झांकना भी मुनासिब नहीं समझा।
इलाहाबाद बैंक के सामने मार्केट में तो गायब ही हो गया नाला
इलाहाबाद बैंक के सामने बने मार्केट में तो धीरे-धीरे करके दुकानदारों ने नाला ही गायब कर दिया। पहले कभी यहां चौड़ा नाला बहता था लेकिन धीरे धीरे उस पर कब्जा होता गया और दुकानें बनती गईं। इसके बाद बड़ी दुकानें और शोरूम तक इस नाले पर बन गए। ये नाला पनबड़िया बिजली उपकेंद्र से होता हुआ छह सड़का वाली साइड में निकलता है। इसके अलावा छह सड़का पर एक इलेक्ट्रानिक सामान का शोरूम तो पूरा का पूरा नाले पर ही बना है। ये भी आज का नहीं, दशकों पुराना है।
दुकानों के आगे बने चबूतरे भी सफाई में आ रहे आड़े
शहर का कोई भी बाजार हो, यहां अधिकांश आवासीय व व्यावसायिक भवन नाले नालियों के ऊपर बने हैं। चबूतरे तो नाले के ऊपर बनाना तो यहां के लोग मानों अपना अधिकार समझते हैं। कुछ ही दुकानदार ऐसे हैं जिन्होंने दुकानों के सामने जाल के चबूतरे बनवाए हैं जिससे वहां से सफाई हो जाती है। सफाई कर्मचारी भी यहां से सिल्ट निकालकर सफाई की औपचारिकता निभा लेते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
नालों की सफाई का कार्य युद्घस्तर पर चल रहा है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही न हो, इसके लिए मजिस्ट्रेट की निगरानी में यह काम कराया जा रहा है। जिन लोगों ने नालों पर स्थायी अतिक्रमण कर रखा है, उन्हें हटवाया जाएगा। इसके लिए उन्हें नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उसके बाद इसका स्थायी समाधान होगा। अतिक्रमणकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
- कुमार प्रशांत, डीएम