बदायूं। कोरोना संकट के बीच रोडवेज घाटे से बाहर नहीं आ पा रहा। बसों का पहिया न घूमने से डिपो का घाटा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में खर्च बचाने के लिए बदायूं डिपो ने 45 बसों को सरेंडर कर दिया है। यह बसें वर्कशॉप में खड़ी थीं। संचालन न होने की दशा में भी प्रति बस के परमिट और टैक्स पर करीब 25 हजार रुपये महीने का खर्च आ रहा था। सरेंडर की गईं बसों की सूची मुख्यालय भेज दी गई है।
एक जून से शुरू अनलॉक वन में निगम ने बसों का संचालन शुरू किया था। रोडवेज बसों को लगातार सवारियों के संकट से जूझना पड़ रहा है। सवारियां इतनी कम हैं कि आधे से ज्यादा बसें वर्कशाप से ही नहीं निकल पा रही हैं जो बसें चल भी रही हैं, उनका भी डीजल खर्च पूरा नहीं निकल पा रहा। खाली बसों से बढ़ रहे टैक्स के भार को कम करने के लिए परिवहन निगम ने बसों के परमिट एआरटीओ में सरेंडर कर दिए हैं। बदायूं डिपो के बेड़े में 131 बसें हैं। सवारियां न होने से इनमें बमुश्किल 65-70 बसों का ही संचालन हो पा रहा है।
बदायूं डिपो की कमाई की बात करें तो कोरोना संकट से पहले सामान्य दिनों में डिपो की बसें औसतन प्रतिदिन 18 से 20 लाख रुपया जुटाती थीं। कोरोना संकट में यह कमाई 10-12 लाख भी नहीं बची है। सवारियां न मिलने से बसों का खर्च तक निकालना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में डिपो को प्रतिदिन लाखों का घाटा हो रहा था। बसों के परमिट सरेंडर करने के बाद डिपो के खर्च में कुछ कमी आएगी।
लॉकडाउन में शून्य आय पर दौड़ीं 70 बसें
बदायूं। लॉकडाउन के दौरान भी डिपो ने शासन के निर्देश पर 70 बसों का संचालन किया। यह बसें शून्य आय पर चलाई गईं। दरअसल, प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए रोडवेज की इन बसों का इस्तेमाल किया गया। लॉकडाउन के दौरान इन बसों ने करीब 2200 प्रवासी मजदूरों को निशुल्क उनके गृह नगरों तक पहुंचाया। बदायूं डिपो की सबसे ज्यादा आय दिल्ली रूट से आती है। लॉकडाउन में यह आय भी बंद हो गई। एआरएम राजेश कुमार का कहना है कि शासन के निर्देश पर रोडवेज बसों से प्रवासी मजदूरों को उनके गृह जनपद भेजा गया था। उनसे किराया नहीं लिया गया। इसकी सूचना मुख्यालय भेजी जा चुकी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
बरेली रीजन में करीब 200 बसों के परमिट सरेंडर किए गए हैं। यह बसें रोड पर नहीं चल रही थीं। टैक्स और बीमा समेत अन्य खर्चों से बचने के लिए परमिट सरेंडर किए हैं। बदायूं डिपो में भी करीब 45 बसों के परमिट सरेंडर किए गए हैं।
- एसके बनर्जी, क्षेत्रीय प्रबंधक