बदायूं। आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तीन तलाक पीड़िताओं के भी गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। उनके अलावा आशा वर्कर और संगिनी के भी गोल्डन कार्ड बनेंगे, जिससे समय-समय पर उनको चिकित्सा सुविधा मिल सके, उनका समय पर इलाज हो सके और वे किसी बीमारी या हादसे के दौरान किसी पर आश्रित न रहें।
प्रदेश सरकार की ये अच्छी पहल है। इसको आगे बढ़ाते हुए आयुष्मान भारत योजना के तहत उन महिलाओं या विवाहिताओं के गोल्डन कार्ड बनाने का निर्णय किया गया है, जिन्हें पति ने तीन तलाक दे दिया है। ऐसी महिलाएं या तो अपने मायके वालों के ऊपर निर्भर हैं या तो स्वयं कहीं नौकरी या मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। उनके सामने रोटी-रोजी की समस्या है। वहीं किसी विपत्ति के दौरान मददगार कम हैं और वेे परेशानी से जूझ रहीं हैं। सरकार की ये पहल उनके लिए वरदान साबित हो सकती है। इसके तहत तीन तलाक पीड़िताओं के गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। इनके अलावा आशा वर्कर और संगिनी के भी गोल्डन कार्ड बनेंगे। जिले में कितनी तलाक पीड़िताएं हैं, इसकी पुष्टि के लिए सीएमओ की ओर से डीएम को एक पत्र लिखा जाएगा। वहीं प्रत्येक गांव में इसका सर्वे कराया जाएगा। इसके अलावा पुलिस से भी जानकारी ली जाएगी कि वास्तव में उनके यहां तीन तलाक के कितने मामले दर्ज हैं। फिर उसके आधार पर पीड़िताओं के गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे।
हमारे पास आदेश आ गया है। हम इसके लिए मंगलवार को डीएम के लिए पत्र भी लिखेंगे। जिले में पता लगाएंगे और सर्वे कराएंगे कि कितनी महिलाएं तीन तलाक पीड़ित हैं, जिससे उनके गोल्डन कार्ड बनाए जा सकें।
-डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ