बदायूं। खुशियों का त्योहार दीपावली लोगों ने हर्षोउल्लास के साथ मनाया। बच्चों को बड़े लोगों के साथ मिलकर जमकर आतिशबाजी छोड़ी, लेकिन इस आतिशबाजी के धुएं ने पर्यावरण में जहर घोलने का काम किया। हालांकि प्रत्यक्ष तौर पर जिले में इसका असर ज्यादा देखने को नहीं मिला, लेकिन अस्थमा समेत सांस की अन्य बीमारियों के मरीजों की दिक्कत इससे बढ़ गई।
पिछले सालों की अपेक्षा इस बार दीपावली पर जिलेवासियों ने ज्यादा पटाखे नहीं छोड़े। इसे पटाखों पर आयी महंगाई कहेंगे या फिर कुछ और लेकिन फिर भी जिले में करीब पांच करोड़ के पटाखे लोगों ने छोड़ दिए, जिसकी वजह से आसमान पर हल्की धुंध छा गई। हालांकि इसका असर तो पटाखे जलाने के कुछ समय बाद तक ही रहा, लेकिन जितने भी पटाखे चलाए गए, उसके घुएं ने पर्यावरण में जहर घोलने का काम किया। चिकित्सकों के अनुसार ये धुुआं फेफड़ों और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इससे खासकर दमा व सांस के रोगियों के लिए दिक्कतें बढ़ जाती है।
गंदगी भी बढ़ गई शहर में
दीपावली के बाद शहर में गंदगी भी बढ़ गई। मंगलवार को भी शहर के कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे नजर आए। चूंकि दीपावली पर लोगों ने घरों की सफाई की थी, साथ ही रात में छोड़ी गई आतिशबाजी का कूड़ा भी था, ऐसे में सोमवार को शहर के कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे रहे जो मंगलवार को भी दिखाई दिए। नगरपालिका प्रशासन ने इन्हें हटवाने की जहमत नहीं उठाई।
दीपावली पर पटाखे छोड़ने की वजह से पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। ऐसे में खासतौर पर दमा व सांस के मरीज अभी घरों से निकलने में थोड़ा परहेज करें।
-डॉ.नितिन कुमार, फिजिशियन जिला अस्पताल