बदायूं। सरकारी केंद्रों पर धान नहीं पहुंचने की वजह से अधिकारी से लेकर केंद्र प्रभारी तक बेहद चिंतित थे। एक अक्तूबर से खरीद शुरू होनी थी, लेकिन माह खत्म होने को आने लगा था और जिले में धान की खरीद नहीं हो सकी थी। दीपावली से एक दिन पहले केंद्रों पर धान पहुंचना शुरू हुआ तो अधिकारियों ने कुछ राहत की सांस ली। अब तक जिले में करीब आठ सौ मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। इधर विभागीय अधिकारियों ने केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने स्तर से किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखें, ताकि ज्यादा से ज्यादा धान केंद्रों तक पहुंच सकें।
शासन की मंशा है कि किसानों को फसल बेचने में दिक्कत न हो, उन्हें फसल का सही दाम मिले। इसके लिए शासन की ओर से फसलों के समर्थन मूल्य घोषित किए जाते हैं। इस बार शासन ने कॉमन धान का समर्थन मूल्य 1815 रुपये निर्धारित किया, वहीं जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने यहां पर धान खरीद सेंटर को एक अक्तूबर से सक्रिय कर दें, निर्देश मिलने के बाद जिला स्तरीय अधिकारियों ने जिले में 33 धान क्रय केंद्रों को खुलवाया, ताकि किसान इन केंद्रों पर आकर अपना धान बेच सकें, लेकिन माह खत्म होने को आने लगा पर सरकारी केंद्रों पर एक भी दाने की खरीद नहीं हो सकी। ऐसे में अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी थीं। इसके बाद अधिकारियों की ओर से केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र मेें जाकर किसानों से वार्ता करें और उन्हें केंद्रों पर धान बेचने के लिए प्रेरित करें। काफी प्रयास के बाद दीपावली से एक दिन पहले धान की खरीद शुरू हुई। अब तक आठ सौ मीट्रिक टन के आसपास धान की खरीद हो चुकी है।
किसानों से संपर्क न साधा तो लक्ष्य पूर्ण होने में होगी कठिनाई
शासन की ओर से विभाग को धान खरीद का लक्ष्य 22 हजार 500 मीट्रिक टन दिया गया है, जो पिछले साल से मात्र 50 मीट्रिक टन कम है। पिछली दफा विभाग को 22 हजार 550 मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, जो विभाग द्वारा पूरा नहीं किया जा सका था। इसका मुख्य कारण क्रय केंद्र प्रभारियों द्वारा किसानों से संपर्क न साधना था। अगर पिछले साल से अधिकारियों ने सबक नहीं लिया, तो इस बार भी लक्ष्य पूरा होना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
केंद्र प्रभारियों को छोड़ना होगा तानाशाही रवैया
सरकारी केंद्र पर जब किसान अपनी फसल बेचने के लिए पहुंचते हैं, तो साधारण किसानों के साथ में तानाशाही वाला रवैया अपनाया जाता है। अधिकतर केंद्र प्रभारियों द्वारा सांठगांठ वाले किसानों को ही वरीयता दी जाती है, जिस वजह से अधिकतर छोटे किसान सरकारी केंद्रों की ओर रुख ही नहीं करते हैैं।
केंद्र पर दलाल हावी होने से होती है दिक्कत
सरकारी केंद्रों पर गेेहूं खरीद से संबंधित अधिकतर काम दलालों और बिचौलियों के माध्यम से किया जाता है। उनकी बिना मर्जी के अधिकतर केंद्र प्रभारी कोई काम नहीं करते हैं। वजह साफ है कि दलालों और बिचौलियों की वजह से प्रभारियों को आर्थिक लाभ मिलता है। ऐसे में कई मर्तबा देखने को मिला है कि ऐसे सेंटरों पर अधिकतर केंद्र प्रभारी नदारद रहते हैं।
जिले में धान की खरीद शुरू हो चुकी है। केंद्रों पर लगातार धान की खरीद की जा रही है। अब तक आठ सौ मीट्रिक टन के आसपास धान की खरीद हो चुकी है। जिन केंद्रों पर धान खरीद शुुरू नहीं हो सकी है, उनके केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के किसानों से संपर्क बनाए रखें, ताकि किसान धान कहीं प्राइवेट जगह नहीं बेचकर सरकारी क्रय केंद्रों पर ही बेचें।
-प्रकाश नारायण, जिला विपणन अधिकारी