बदायूं। शासन ने जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद जिला प्रशासन ने टीम गठित कर प्रत्येक ब्लॉक में ऑडिट करने की बात कही। गठित की गई टीम को मनरेगा के तहत किए कार्य और प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में ऑडिट करना था, लेकिन टीम कुछेक गांव में ही ऑडिट करने के लिए पहुंची। वहीं सांठगांठ होने के बाद में उन्होंने बिना जाए, घर बैठे-बैठे ही ग्राम पंचायतों को ऑडिट कर दिया। जब विभाग की ओर से इसकी क्रॉस चेंकिग कराई गई, तो मामले की पोल खुलकर सामने आयी। निरीक्षण करने पहुंची टीम को पता चला कि कई गांवों में कोई भी टीम ऑडिट करने के लिए नहीं पहुंची है। टीम ने अपनी रिपोर्ट विभागीय अधिकारी को दे दी है।
डीएम ने सभी ब्लॉकों में ऑडिट कराने के निर्देश दिए। जिसके बाद में विभाग की ओर से टीमों का गठन किया गया। साथ ही सभी को ब्लॉक आवंटित कर दिए गए। आवंटित ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में गठित टीम को पहुंचकर चौपाल के माध्यम से मजदूरों से बात करनी थी। साथ ही विकास कार्यों, खड़ंजा, नाली, तालाब आदि कार्यों की जांच, एस्टीमेट, खर्च किए गए धन आदि का मिलान किया जाना था। इसके लिए शुरुआत में तो कुछेक गांव में टीम पहुंची और गांवों में ऑडिट किया। उसके बाद में टीम ने प्रधानों से सांठगांठ कर घर बैठे-बैठे ही ऑडिट कर दिया। वहीं ऑडिट टीम के गांव में नहीं पहुंचने की शिकायतें, विभाग के पास लगातार पहुंचने लगी। साथ ही टीम पर आरोप भी लगने लगे। इसके बाद विभाग की ओर से पिछले दिनों संबंधित ग्राम पंचायतों में एक अन्य टीम से जांच कराई गई, जब टीम ग्राम सभा रफतपुर पहुंची, तो उन्होंने ऑडिट टीम से जानकारी की, तो पता चला कि गांव में ऑडिट हो चुका है। जब संबधित रजिस्टर मांगा, तो उस पर अंगूठा निशानी और हस्ताक्षर मिले। लेकिन वहां पर कोई भी कार्यवृत्त नहीं लिखा पाया गया और गांव में ऑडिट के संबंध में भी किसी को कोई जानकारी नहीं दी गई। यही हाल ग्राम पंचायत सहादातपुर नाचनी का था। यहां पर टीम के सदस्यों से जानकारी की, तो केवल एक ही रजिस्टर दिखाया गया। वह भी अपूर्ण था। ग्राम पंचायत सैफपुर में भी लगभग ये ही हाल रहे।
शासन के निर्देश पर ग्राम पंचायतों का ऑडिट कराया गया था लेकिन ऑडिट करने वाली टीम की शिकायतें मिली थी। उनसे जवाब मांगा गया है।
-चंद्रशेखर, डीडीओ