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मिलावटखोर सक्रिय...लो नींद से ‘जाग’ गया खाद्य विभाग

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बदायूं। एक बार फिर त्योहारी सीजन शुरू होने पर जहां एक तरफ मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं, वहीं साल भर में गाहे बगाहे त्योहारों पर जगने वाला खाद्य सुरक्षा विभाग एक बार फिर अपनी नींद से ‘जाग’ गया है। विभाग साल भर भले ही कछुए की चाल चले, लेकिन त्याहारों पर उसकी चाल जरूर तेज हो जाती है। दीपावली नजदीक देख कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में मिलावटखोर एक बार फिर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने को तैयार हैं। ऐसे में लोगों को खुद ही सक्रिय होना होगा ताकि उनकी त्योहारी खुशियों के रंग में भंग न पड़ जाए।
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चंद दिनों के अंदर दीपावली के साथ ही धनतेरस, गोवर्धन, भैयादूज आदि कई बड़े त्योहार हैं। इन त्योहारों पर घरों में जहां अनेक तरह के पकवान बनते हैं, वहीं बाजार से भी सामान की खरीदारी ज्यादा होती है। ऐसे में दुकानदार मिलावट करने से बाज नहीं आते हैं। बात चाहे मिलावटी खोवा हो या फिर पनीर, दूध, नमकीन आदि खाद्य पदार्थों की, मसालों में भी कई घातक चीजों को मिलाकर ग्राहकों को लूटा जाता है, लेकिन इन सबके बीच खाद्य विभाग की जो कार्यशैली रहती है, वह हमेशा ही सवालों के घेरे में रहती है। उसकी वजह है कि खाद्य विभाग साल में होली, दीपावली, रक्षाबंधन आदि पर ही मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए अभियान चलाता है। बाकी दिनों में इस तरह गायब हो जाता है जैसे उसे किसी से कोई सरोकार ही न हो। विभाग की इस ढिलाई और गैरजिम्मेदार कार्यशैली का लाभ दुकानदार खूब उठाते हैं।

पिछले साल दीपावली पर लिए गए मात्र 14 नमूने
खाद्य महकमे की कार्यशैली का अंदाजा जो आंकड़ों ही लगाया जा सकता है। यूपी में क्षेत्रफल के लिहाज से बड़े जिलों में शुमार रखने वाले बदायूं में पिछली दीपावली पर खाद्य विभाग ने मात्र 14 नमूने लिए। इनमें खोवा, मिश्रित दूध, पनीर के दो-दो और एक नमकीन का नमूना फेल हुआ।
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कई दुकानदार पहले से ही हैं मिलावट को बदनाम
शहर में ही कई दुकानदार ऐसे हैं, जो मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री के लिए पहले से ही बदनाम हैं, लेकिन उनके मिलावटखोरी के धंधे पर आज तक विराम नहीं लग पाया है। यदि चर्चाओं पर सच मानें तो ऐसे दुकानदारों की सेटिंग विभाग में बहुत रहती हैं जो छापे की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही उन्हें सूचना मिल जाती है, तब वह दुकानों के शटर गिराकर इधर-उधर हो जाते हैं।

सिंथेटिक खोवा तैयार करने के लिए इनकी होती है जरूरत
यूरिया, रिफाइंड, माल्टा, फारमोलिन, सफेदी आदि के घोल से सिंथेटिक दूध बनाया जाता है। इस दूध से पाउडर बनता है। इस सिंथेटिक पाउडर, दूध, चिकनाई के लिए रिफाइंड, पाम ऑयल व सूजी आदि की सहायता से खोवा बनाया जाता है। इस खोवे से त्योहारों का सीजन आते ही मिठाई बनाने का धंधा शुरू हो जाता है।

होली पर पकड़ा गया था नकली खोवा
दातागंज तहसील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नकली खोवा तैयार किया जाता है। यह खोवा दूसरे जिलों को सप्लाई किया जाता है। किसी भी पकड़ में न आए इसके लिए धंधेबाज रोडवेज बसों का सहारा लेते हैं। इसी साल होली के मौके पर बड़ी मात्रा में नकली खोवा पकड़ा गया था, हालांकि यह खोवा किसका था, यह स्पष्ट नहीं हो सका था।

खुद ऐसे करें मिलावट की पहचान
दूध-आधा कप दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाएं, यदि झाग आए तो दूध में डिटर्जेंट मिला हुआ है।
- दूध को हथेलियों के बीच रगड़ें, यादि यह साबुन जैसा लगे तो सिंथेटिक दूध हो सकता है।
- गर्म करने पर सिंथेटिक दूध गर्म करने पर हल्का पीला हो जाता है।

मावा-
- मावे को अंगूठे के नाखून पर रगड़ें। यदि यह असली है तो इसमें से घी की महक आएगी और खुशबू देर तक रहेगी।
- हथेली पर मावे की गोली बनाएं। अगर यह फटने लग जाए तो समझ लें कि मावा नकली है या इसमें मिलावट की गई है।
- मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करने अगर यह पानी छोड़ने लगे तो नकली है।

घी
घी में कुछ बूंदे आयोडीन टिंचर की मिलाने पर यदि रंग नीला हो जाए तो घी में आलू, शकरकंदी या अन्य स्टार्च मिलाया गया है।
- एक चम्मच घी में एक चम्मच हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एक चुटकी चीनी मिलाएं। अगर घी का रंग लाल हो जाए तो इसमें डालडा की मिलावट है।
- थोड़ा सा घी हाथों में रगड़ें। इसे करीब 15 मिनट बाद सूंघकर देखें अगर खुशबू आनी बंद हो जाए तो मान लीजिए कि यह मिलावटी घी है।

बेसन
कांच के गिलास में थोड़ा सा बेसन लें और उसमें थोड़ा सा पानी डालें, फिर उसमें सांद्र हाइड्रोक्लोरिक ऐसिड (एचसीएल) की चार से पांच बूंदे डाले, एसिड डालते ही जामुनी रंग आए तो समझे कि बेसन मिलावटी है।

डॉक्टर की राय
त्योहारों के दिनों में बिकने वाली मिठाई आमतौर पर कई दिन पहले बना ली जाती है। इतना ही नहीं उसे फ्रेश दिखाने और कलर्ड करने के लिए केमिकल का भी इस्तेमाल किया जाता है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थ भी जमकर बिकते हैं। बेहतर होगा कि इस प्रकार की चीजों का परीक्षण करने के बाद ही उनका प्रयोग किया जाए, क्योंकि इनके सेवन से डायरिया, फूड प्वॉयजनिंग व पेट संबंधी अन्य बीमारियां भी हो सकती है। कोशिश करें कि कम से कम मिठाई का उपयोग किया जाए।
-डॉ. नितिन, फिजीशियन, जिला अस्पताल

विभाग की ओर से नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाया जाता है। त्योहारों पर विशेष टीम बनाकर अभियान चलते हैं। इस बार भी दो टीम बनाई गई हैं। एक टीम में चार सदस्यों को रखा गया है, जो लगातार छापा मार कार्रवाई कर रहे हैं।
-चंद्रशेखर मिश्र, अभिहीत अधिकारी

खाद्य विभाग की टीम ने मारा छापा, लिए नमूने
दातागंज (बदायूं)। खाद्य विभाग की टीम ने कोतवाली पुलिस के साथ शुक्रवार को खोवा मंडी में छापा मारा। इससे मंडी के दुकानदारों में अफरातफरी मच गई। टीम ने कई नमूने भी लिए। खोवा मंडी में छापामार कार्रवाई की खबर से आनन फानन में बाजार बंद हो गया। ज्यादातर दुकानदारों ने अपने शटर गिरा दिए।
मुख्य खाद्य निरीक्षक धनंजय शुक्ला की अगुवाई में टीम ने पुलिस के साथ स्थानीय खोवा मंडी में छापा मारा। करीब घंटे भर तक टीम खोवा मंडी में रही। खाद्य विभाग की टीम के नगर में होने की खबर हवा के साथ फैल गई थी, सो बाकी दुकानदारों ने भी अपनी दुकानों को बंद कर लिया और वे टीम की हर गतिविधि के बारे में जानकारी लेते रहे। खोया मंडी के साथ ही बाजार में भी दुकानें बंद हो गईं। बताया गया कि टीम ने चीनी के बताशे, खिलौने आदि के नमूने लिए हैं, जो जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। संवाद
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