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जिम्मेदारी उठाने को तैयार युवा, बोले- प्रशासन हमें दे मौका

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बदायूं। जिले में कभी अपने पानी से किसानों को राहत देने वाली सोत नदी भूमाफिया के कब्जे में क्या आई, इसकी बहने वाली निर्मल धारा हमेशा के लिए समाप्त हो गई। लोगों की तमाम शिकायतों के बाद भी प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद में सोत नदी के पुनर्जीवन को लेकर उम्मीद जगी, जिसके बाद में लोगों ने शासन, प्रशासन का इस ओर ध्यान आकर्षित कराया। इसके बाद में प्रशासन की ओर से सोत नदी पर किए गए अतिक्रमण को हटाना शुरू किया गया, लेकिन उसकी खुदाई के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। ऐसे में कुछ संगठन आगे आए हैं, उनका कहना है कि अगर प्रशासन अपने स्तर से इसकी खुदाई नहीं करा सकता है, तो वह इसके लिए उनको अनुमति दें, जिससे वह इसकी खुदाई को शुरू करा सकें।
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सोत नदी बदायूं जिले की पहचान है। इसके होने से जिले के किसानों को काफी राहत थी, लेकिन इसके प्राकृतिक स्रोत बंद होने और अतिक्रमण की वजह से यह सूखती गई। ऐसे में लोगों ने शासन-प्रशासन से सोत नदी को अतिक्रमण मुक्त करते हुए दोबारा से इसके पुनर्जीवन की मांग की, लेकिन प्रशासन की ओर से सफाई को लेकर कोई पहल नहीं की गई है। अमर उजाला द्वारा लगातार इसके पुनर्जीवन के लिए अभियान चलाए जाने के बाद भारतीय एकता परिवार के संयोजक सचिन सूर्यवंशी और युवा मंच संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ध्रुवदेव गुप्ता ने पदाधिकारियों के साथ में सोत नदी के पुनर्जीवन को लेकर रणनीति तैयार की है। उन्होंने कहा है कि अगर प्रशासन अपने स्तर से इसकी सफाई नहीं करा सकता है, तो वह संगठन को सफाई कराने का मौका दे। संस्था व संगठन आपसी जनसहयोग से चिह्नित भू-भाग की खुदाई कराकर गंगा की अविरल धारा से जोड़ने का कार्य करेंगे।

पौधरोपण और हरित पट्टी का भी रखा प्रस्ताव
सचिन और ध्रुवदेव गुप्ता का कहना है कि यदि अनुमति मिलती है तो खुदाई के बाद बहाव मार्ग के दोनों ओर पौधरोपण कर हरित पट्टी का निर्माण कराया जाएगा, ताकि भविष्य में भी कोई सोत नदी के किनारे पर अतिक्रमण नहीं कर सके, साथ ही पौधों के लगने के बाद में पशु-पक्षी भी संरक्षित रहेंगे। अगर इन बिंदुओं की रूपरेखा पर विचार कर प्रशासन अनुमति नहीं देता है, तो समझा जाएगा कि जिला प्रशासन सोत को पुनर्जीवित कराना ही नही चाहता।
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क्या बोले लोग

सोतनदी के पुराने अस्तित्व में लौटने से जिले के काफी किसानों को लाभ मिलेगा। इससे जहां बिजली की खपत कम होगी। वहीं किसानों को कम लागत में अच्छी फसल मिलेगी। ऐसे में किसानों की कम कीमत पर अच्छी फसल तैयार हो जाएगी।
-ध्रुव देव गुप्ता

कायदे में प्रशासन को सोत नदी के पुनर्जीवन की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि जिले के किसानों को इसका लाभ मिल सके, लेकिन प्रशासन की रुख कुछ और ही लग रहा है।
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- संजय पाठक
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