बदायूं। कृषि विभाग की टीम एडीजे भानुदेव शर्मा के साथ उनके गांव खवासपुर जिला बुलंदशहर गई। एडीजे के साथ में पांच किसान भी बदायूं से गए। वहां जाकर टीम ने केले की खेती का अध्ययन किया, साथ ही उससे होने वाले मुनाफे के बारे में भी जाना। एडीजे अपने गांव में केले की फसल करते हैं।
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि डीएम दिनेश कुमार सिंह के निर्देश पर एडीजे के साथ में जिले से गांव मोंगर निवासी अशोक कुमार सिंह, बेलाडंडी निवासी विवेक यादव, ककोड़ा निवासी वीरेश, सालारपुर निवासी मयंक राठौर, रघुनाथपुर पीपरी निवासी अंचित और उद्यान विभाग के अजीम रिजवी गए थे। उन्होंने वहां पर केले की फसल देखी, साथ ही उन्होंने जाना कि इसकी खेती कैसे तैयार होती है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि खेत की तैयारी, पौध रोपण, लेबर, सिंचाई, खाद/माइक्रोन्यूट्रिएंट, दवाई , पौधों में स्टाकिंग सहित प्रथम वर्ष में एक केले का पौधा तैयार होने में 100 रुपये प्रति पौधा खर्च आता है और एक साल में एक पौधा 300 से 350 रुपये की आमदनी देता है। यदि मार्केट अच्छी मिली तो 400 रुपये से ज्यादा भी मिल जाते हैं। दूसरे वर्ष में लागत लगभग आधी हो जाती है। एक फसल से अधिकतम पांच बार फसल काटी जा सकती है। इंटर क्रॉपिंग से भी आमदनी ली जा सकती है। उन्होंने बताया कि एक हेक्टेयर में 3086 पौधे लगाये जाते हैं और उद्यान विभाग दो हेक्टयेर तक पौधों पर अनुदान भी देता है।