बदायूं। जिले मेें गन्ने की फसल पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। किसानों ने फसल काटना शुरू कर दिया है। शासन से चीनी मिलों को चलाने के लिए नवंबर के पहले सप्ताह का समय मिला है। ऐसे में किसानों को मजबूरी में गन्ने की फसल को कोल्हू पर बेचना पड़ रहा है। इसका फायदा कोल्हू वाले जमकर उठा रहे हैं और वह औने पौने दाम पर 160 से 190 रुपये में किसानों का गन्ना खरीद रहे हैं।
इधर, यदु मिल पर किसानों का पिछले साल का ही लगभग 114 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है। ऐसे में किसान वहां गन्ना डालना नहीं चाहते। इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
सरकार चाहती है कि किसानों की आय दोगुनी हो, लेकिन उसकी मंशा केवल अधिकारियों के अभिलेखों तक ही सीमित रह गई है। किसानों ने पिछले साल चीनी मिलों को गन्ना की फसल दी थी, लेकिन एक साल बाद भी उसका भुगतान नहीं हो सका है। ऐसे में किसान अब तक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनके द्वारा कर्ज लेकर इस साल गन्ने की फसल की गई थी, जो अब खेतों में तैयार हो गई है और किसानों ने इसे काटना शुरू कर दिया है। चूंकि चीनी मिलों के शुरू होने की तिथि सरकार की ओर से नवंबर के प्रथम सप्ताह में रखी गई है, ऐसे में किसानों को मजबूरी में अपना गन्ना कोल्हुओं पर डालना पड़ रहा है। किसानों की मजबूरी का फायदा कोल्हू संचालक जमकर उठा रहे हैं। वे किसानों का गन्ना औने-पौने दामों पर खरीद रहे हैं। किसानों को चीनी मिल द्वारा पुराना पेमेंट नहीं मिला है, ऐसे में वे सस्ते में ही गन्ना बेचने को मजबूर हैं। इस तरह किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
किसान नहीं बेेचना चाहते हैं यदु मिल पर गन्ना
बिसौली तहसील में स्थित यदु शुगर मिल पर गन्ना किसानों का 114 करोड़ सात लाख रुपये पिछले साल का बकाया आ रहा है। जिसकी वजह से किसान मिल पर अपने गन्ने को इस बार बेचना नहीं चाह रहे हैं। किसानों द्वारा लगातार विभाग से दूसरी चीनी मिल के कांटे सेंटरों पर लगाए जाने की मांग की जा रही है।
इस बार कम रकबे का गन्ना मिलेगा यदु को
यदु शुगर मिल पर जहां पिछले साल किसानों ने भरोसा जताते हुए करीब 29 हजार हेक्टेयर जमीन का गन्ना उन्हें बेचा था, वहीं पेमेंट में हो रही दिक्कतों के चलते इस बार किसानों ने यदु शुगर मिल को गन्ना देने से इंकार कर दिया है। इस बार बमुश्किल 11 हजार हेक्टेयर जमीन का गन्ना ही यदु शुगर मिल को मिल सकेगा।
पिछले साल का भुगतान नहीं, इस बार भी आर्थिक दिक्कत
चीनी मिल द्वारा पिछले साल का ही भुगतान नहीं किया गया है, ऐसे में आर्थिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। क्या करें, कई बार अपने बकाया पैसे को लेकर चीनी मिल अधिकारियों से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों से मांग की, लेकिन कोई फायदा नहीं निकाला।
-हाकिम सिंह, बेला गांव
हमारी कोई सुनने को ही तैयार नहीं है। चीनी मिल से आज तक कोई भुगतान नहीं हो सका है। सरसों, गेहूं की बुवाई के लाले पड़ गए हैं, वहीं बीज कैसे खरीदें, ये संकट भी गहराया हुआ है। अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए अब गन्ने को कोल्हुओं पर बेचना शुरू किया है।
-उदय प्रताप, गुलड़िया
चीनी मिलों की बहुत बुरी स्थिति है। उनके द्वारा गन्ना किसानों को पेमेंट नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अब गन्ने की खेती ही छोड़ना बेहतर रहेगा। कम से कम दूसरी फसल करने से पेमेंट को लेकर इतना समय इंतजार तो नहीं करना होगा। अन्य फसलों में कुछ ही दिन में पेमेंट हो जाता है।
-अंकित पटेल, आमगांव
कोई भी किसानों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। हर कोई गरीब को परेशान करने में लगा हुआ है। यही वजह है कि आज तक चीनी मिल की ओर से किसानों को गन्ने का पेमेंट नहीं किया है। ऐसे में परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्ज लेने तक की मजबूरी बन गई है।
- सुरेश, सिताबनंबर
चीनी मिलों को नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन मिल प्रशासन चाहे तो इससे पहले भी मिल को शुरू कर सकता है। ताकि किसानों को परेशानी न हो।
-राम किशन, गन्ना अधिकारी