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छह माह में तीन दर्जन गोवंश की हो चुकी मौत

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जिले में हैं कुल 329 गोशालाएं, पाले जा रहे 5900 लावारिस गोवंश

बदायूं। खेतों और सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं की वजह से लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े, इसको देखते हुए शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने अस्थायी गोशालाओं का निर्माण कराया, साथ ही अभियान चलाकर सड़कों पर लावारिस घूम रहे गोवंश को पकड़कर इसमें रखा। इनकी देखभाल के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई। हालांकि पिछले छह माह में विभिन्न कारणों से अब तक करीब 35 गोवंश की मौत हो चुकी है।
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योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालने के बाद शासन के निर्देश पर प्रत्येक जिलों में अस्थायी गोशालाएं बनाई गईं। पहले जिले में 699 अस्थायी गोशालाएं बनाई गईं, जिसमें पशुपालन विभाग की टीम के साथ अन्य टीमों ने मिलकर 6300 गोवंश को पकड़कर बंद किया, लेकिन पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा होने लगा। ऐसे में शासन की ओर से प्रत्येक पशु के हिसाब से 30 रुपये प्रतिदिन प्रत्येक जिले की मांग के अनुरूप धनराशि को अवमुक्त किया गया। कुछ जगहों पर अस्थायी गोशालाओं में 10 से कम गोवंश थे, ऐसे में विभाग ने उन गोशालाओं के पशुओं को पड़ोस की गोशाला में भेजकर इन गोशाओं को बंद कर दिया। अब जिले में 329 गोशालाएं रह गई हैं, जिसमें 6300 गोवंश पाले जा रहे थे। पिछले दिनों इनमें से 408 गोवंश को गांव वालों की सपुदर्गी में दे दिया गया। ऐसे में अब इन गोशालाओं में 5900 गोवंश रह गए हैं। पिछले छह माह में विभिन्न कारणों से इनमें 35 गोवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी है। इसमें रविवार को हुई 22 गोवंश की मौत भी शामिल है। इससे पहले 25 अगस्त को गांव मरौरी के पास में हाईवे किनारे बैठे गोवंश को अज्ञात वाहनों को रौंद दिया था। इसमें पांच पशुओं की मौत हो गई थी। 24 अगस्त को म्याऊं गांव के पास में चार गोवंश के शव बरामद हुए थे। इससे पहले भी कुछ गायों की मौत हो चुकी है।

ग्राम समाज की जमीन पर उगाई जा रही फसल
जिला प्रशासन के निर्देश पर प्रधानों, सचिवों और लेखपालों को खास निर्देश दिए थे कि जिन जगहों पर ग्राम समाज की जमीन खाली पड़ी हो, तो उन पर चारा किया जाए, ताकि ये चारा अस्थायी गोशालाओं में रखे गए गोवंश के लिए काम आ सके और अगर कहीं पर हरे चारे की व्यवस्था नहीं हो रही है तो ठेकेदार के माध्यम से हरे चारे की व्यवस्था कराई जाए।
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सही ने नहीं दफनाया गया गोवंशीय पशुओं के शवों को, खींच रहे कुत्ते
बदायूं। विश्व हिंदू परिषद ब्रज प्रांत के प्रांतीय अधिकारियों ने जिलाध्यक्ष सुनील राठौर के नेतृत्व में चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को कान्हा गोशाला कछला में गोवंशीय पशुओं को देखने के लिए भेजा। जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत प्रशासन ने मृत गोवंशीय पशुओं के शवों को ठीक प्रकार से गड्ढे में नहीं दफनाया, जिससे वहां कुत्ते उनको खींच रहे हैं। आरोप है कि जब ईओ को इस संबंध में अवगत कराया गया तो उन्होंने भी कोई ध्यान नहीं दिया। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि जिस विषाक्त चारे को खाकर गोवंशीय पशु मरे हैं, वही चारा गोशाला के पास में ही पड़ा हुआ है, जिससे उसे खाकर घुमंतू पशु और पालतू पशु हादसे का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने नगर पंचायत प्रशासन से उस चारे को किसी गड्ढे में दबाने की मांग की। इस मौके पर जिला मंत्री विनय प्रताप सिंह, सत्येंद्र यादव तथा अरविंद शर्मा उनके साथ रहे।

गोशाला का निरीक्षण कर दिए निर्देश
बदायूं। कछला में दो दर्जन गायों की मौत के बाद पालिका प्रशासन सतर्क हो गया है। सोमवार को बिसौली नगर पालिका अध्यक्ष अबरार अहमद ने गोशाला का निरीक्षण कर कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। पालिकाध्यक्ष ने गोवंश के चारे आदि का खासकर ध्यान रखने को कहा। कर्मचारियों को निर्देश देते हुए श्री अहमद ने कहा कि कोई भी बाहरी व्यक्ति गोशाला के भीतर प्रवेश न कर पाए। साथ ही साफ सफाई रखने के लिए जरूरी निर्देश दिए। इस दौरान राजस्व लिपिक राजीव कुमार, सभासद विनीत वार्ष्णेय, सत्यपाल, राजेश, संजय, नरेश आदि मौजूद रहे।

अस्थायी गोशाला से 17 गोवंशीय पशु चोरी, तहरीर
कादरचौक। कस्बे में खुली अस्थायी गोशाला से रविवार रात 17 गोवंशीय पशु चोरी हो गए। जानकारी होने से गोवंश की तलाश की गई तो तीन गोवंश खेतों में मिल गए, जबकि 14 गोवंश का कहीं पता नहीं चला है। कादरचौक की प्रधान सरला गुप्ता ने पुलिस को तहरीर दी है।
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