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सरकारी रिकॉर्ड सही मानें तो सोकपिट पूरे मगर मौके पर एक नहीं

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बदायूं। सरकार का सीधा फोकस पानी बचाने पर है। इसको लेकर शासन की ओर से जल शक्ति अभियान ‘जल बचाओ-जीवन बचाओ’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसके तहत जिले में जल और वर्षा जल संरक्षण के लिए नवीन तालाब का निर्माण कराना था। भूमि सुधार के लिए मेढ़बंदी, खेत में तालाब के निर्माण समेत दोबारा प्रयोग व भूगर्भ जल बढ़ाने के लिए हैंडपंपों के पास में सोकपिट का निर्माण किया जाना था, ताकि हैंडपंपों से निकलने वाला पानी जो उपयोग में नहीं आ रहा है, वह सोकपिट के माध्यम से जमीन में पुन: चला जाए और जलस्तर में वृद्धि हो सके, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। विभाग सिर्फ कागजों में ही इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है, गांव वालों से मिली जानकारी इसके विपरीत है। उनका कहना है कि धरातल पर कहीं सोकपिट दिखाई नहीं दे रहे हैं। जहां काम हुआ भी है तो आधा-अधूरा है।
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केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार जल शक्ति अभियान को लेकर बेहद गंभीर है। वहीं ‘सरकार जल शक्ति अभियान’ के अंतर्गत पांच बिदुओं पर काम कर रही हैं। इसमें जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वाटरशेड विकास, पारंपरिक एवं अन्य जल निकायों का नवीनीकरण, सघन पौधरोपण और पुन: प्रयोग व भूगर्भ जल बढ़ाने के लिए संरचना बनाई गई है। इसके तहत जिले में तालाबों का जीर्णोद्धार, अभिमुक्त तालाब, मेढ़बंदी, सोकपिट, कुओं की सफाई, खेत तालाब का निर्माण करना था, लेकिन ये काम केवल तालाबों की खुदाई और मेढ़बंदी तक ही सीमित होकर रह गया। इसके तहत सोकपिट भी बनवाए जाने थे, ताकि हैंडपंप का पानी सड़कों और नालियों में यूूं ही बरबाद न हो और वह सोकपिट के माध्यम से पुन: जमीन में समा जाए, लेकिन कागजी हकीकत जमीनी हकीकत बिल्कुल ही अलग है। जिले में 767 सोकपिट बनाए जाने थे। विभाग की माने तो ये सभी बन गए हैं, गांव वालों से मिली जानकारी इसके विपरीत है। सही मायनों में कहीं पर भी सोकपिट का निर्माण नहीं किया गया है। जहां कुछ हुआ भी है तो वह आधा-अधूरा है।

अब तक सरकारी बिल्डिंगों में नहीं लगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
योजना के तहत जिले में सरकारी बिल्डिंगों में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाना था लेकिन अब तक अधिकतर विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई। हालांकि पावर कॉरपोरेशन की ओर से जरूर पिछले दिनों कार्यालय परिसर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है।
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केंद्र सरकार की टीम भी जता चुकी है नाराजगी
18 सितंबर को जब केंद्र सरकार की टीम आयी थी, उस टीम में केंद्र सरकार के आवास एवं शहर विकास निदेशक विनय प्रताप सिंह, केंद्रीय भूगर्भ जल विभाग के टीओ जगदंबा प्रसाद शामिल थे। उनके द्वारा रफातपुर ग्राम पंचायत में तैनात ब्लॉक कोआर्डिनेटर और साहादातपुर नाचनी में ब्लॉक कोआर्डिनेटर से जवाब तलब किया गया।

जिले के तीन ब्लॉकों है सरकार का फोकस
प्रदेश के प्रत्येक जिले के डार्क जोन में शामिल ब्लॉक पर शासन का सीधा फोकस रहा है। इसके तहत बदायूं के आसफपुर, अंबियापुर और इस्लामनगर का चयन किया गया था। जिस पर शासन से लेकर प्रशासन तक का जल संचयन को लेकर जोर है। इसके तहत टीम भी इन ब्लॉकों का भ्रमण कर चुकी। इन ब्लॉकों में एक भी सोकपिट नहीं बना है।

विभाग का दावा, डार्क जोन में शामिल तीन ब्लॉकों में इतना हुआ काम
-अतिक्रमण मुक्त तालाब-25
- मेढबंदी-291
- सोकपिट-767
- तालाब-155

योजना के तहत लगातार काम चल रहा है। जहां पर भी कमियां है, उनमें सुधार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक जल संचयन हो सके और वाटर लेवल को बढ़ाया जा सकें।
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-चंद्रशेखर, डीडीओ
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