बदायूं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भले ही बैंकों में सिक्के जमा करने को लेकर कई बार सर्कुलर जारी कर चुका हो, लेकिन एसबीआई पर इसका कोई असर नहीं। आम लोगों की बात दूर की है, एसबीआई सरकारी विभागों से ही सिक्के लेने से इंकार कर रही है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीबी पुष्कर ने इसकी शिकायत एसबीआई मुख्यालय के साथ रीजनल ऑफिस और ब्रांच मैनेजर से की है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज औसतन 1400-1500 मरीज आते हैं। बाह्य रोगियों के लिए एक रुपये का पर्चा बनवाना होता है। जिला अस्पताल की रोगी कल्याण समिति का बैंक खाता एसबीआई मेन ब्रांच में है। नए ओपीडी पर्चों से आने वाले रुपयों को इसी खाते में जमा किया जाता है, लेकिन एसबीआई मेन ब्रांच सिक्के जमा करने से इंकार कर रहा है। इससे जिला अस्पताल प्रशासन के सामने समस्या खड़ी हो रही है। सोमवार को भी रोगी कल्याण समिति के खाते में जमा करने के लिए 2.14 लाख रुपये भेजे गए थे। इनमें करीब एक हजार रुपये के सिक्के भी थे। यहां जमा काउंटर पर सिक्के लेने से इंकार कर दिया गया। बैंक से लौटे कर्मचारियों ने इस बारे में जानकारी सीएमएस डॉ. केके पुष्कर को दी। यह भी बताया कि बैंक सिक्कों को लेकर लगातार परेशान कर रहा है। इस संबंध में सीएमएस ने एसबीआई मुख्यालय के साथ क्षेत्रीय प्रबंधन और मेन ब्रांच प्रबंधक से शिकायत की है।
बैंक सिक्के लेने से इंकार कर रहा है। यह रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। जिला अस्पताल प्रशासन को लगातार सिक्कों को लेकर परेशानी हो रही है। सिक्कों को लेकर बैंक के इस रुख से बाजार और आम लोगों में भी गलत संदेश जाता है। इससे सिक्कों को लेकर भ्रम पैदा होता है। इस संबंध में बैंक मुख्यालय, रीजनल अधिकारियों के साथ स्थानीय शाखा प्रबंधक को भी लिखा गया है।
- डॉ. बीबी पुष्कर, सीएमएस
आरबीआई की गाइड लाइंस हैं कि कोई बैंक सिक्के लेने से इंकार नहीं कर सकता। हो सकता है कि सिक्के गिनने में देरी की वजह से इन्हें लेने से इंकार किया गया हो। अस्पताल प्रशासन को भी चाहिए कि जो भी सिक्के हैं उनको वह रोज जमा करे। सिक्के लेने से क्यों मना किया गया इस बारे में मैं खुद जानकारी करूंगा।
- श्याम पासवान, एलडीएम