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सिस्टम बेहाल- अरे साहब! यहां तो 1.38 करोड़ की दवा ‘हजम’ कर गए मच्छर

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बदायूं। ग्राम पंचायत स्तर पर गठित स्वास्थ्य और स्वच्छता समितियों की निष्क्रियता से जिले में संक्रामक रोगों की स्थिति बेकाबू है। गांवों में मच्छर नाशक दवाओं के छिड़काव पर करीब 1.38 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद बुखार, मलेरिया, फैल्सीपेरम की चपेट में आकर सौ से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। अब भी हालात काबू नहीं हो रहे। देहात से लेकर मुख्यालय तक अस्पताल बुखार के मरीजों से भरे हुए हैं। संदिग्ध डेंगू के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। यह बात अलग है कि स्वास्थ्य विभाग बुखार से एक भी मौत होने की बात अब तक स्वीकार नहीं कर रहा।
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जिले में 1038 ग्राम पंचायतें हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में संक्रामक, मच्छरजनित रोगों पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता समितियों का गठन किया गया है। समितियों के बैंक खातों का संचालन संबंधित ग्राम पंचायत के प्रधान और एएनएम के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है। संक्रामक रोगों के सीजन में फॉगिंग कराने समेत मच्छर नाशक दवाओं के छिड़काव और ब्लीचिंग पाउडर की उपलब्धता को समितियों को 10-10 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए थे। जिले की सभी 1038 ग्राम पंचायतों को 1.38 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे। मच्छर जनित बीमारियों और संक्रामक रोगों का सीजन शुरू होने के साथ जिले में मलेरिया, फैल्सीपेरम के प्रकोप ने साफ कर दिया कि स्वास्थ्य और स्वच्छता समितियां कितनी गंभीरता से काम कर रहीं हैं। पंचायती राज और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। हालांकि, इसके बावजूद जिले के 94 से ज्यादा गांवों में संक्रामक बीमारियों के प्रकोप पर चुप्पी साध जाते हैं।

जिले में अब तक 1.30 लाख लोगों को बुखार ने घेरा
ग्राम पंचायत स्तर पर काम करने वाली स्वच्छता और स्वास्थ्य समितियां सही ढंग से काम कर रहीं होतीं तो हालात इतने भयावह नहीं होते। करीब डेढ़ महीने में जिले में जहां 1.30 लाख लोगों को बुखार गिरफ्त में ले चुका है, वहीं सौ से ज्यादा लोगों की बुखार से जान भी जा चुकी है। अब तक करीब 70 संदिग्ध डेंगू के मरीज मिले हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग बुखार से मौत और अब तक किसी मरीज में डेंगू की पुष्टि से इंकार कर रहा है। विभाग अब तक केवल 1.30 लाख से ज्यादा बुखार पीड़ितों की बात स्वीकार रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि बुखार का सबसे ज्यादा प्रकोप ग्रामीण इलाकों में ही है।
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यह बात सही है कि कुछ ग्राम पंचायतों में स्वच्छता समितियां सक्रिय नहीं हैं। कई ऐसे गांव भी हैं जहां गंदगी ज्यादा है। गोबर को नालियों में बहाने से समस्या हो रही है। सभी गांवों में फॉगिंग हो इसका प्रयास किया जा रहा है। अगर किसी गांव से शिकायत मिलती है तो वहां विशेष सफाई अभियान चलाया जाता है। कुछ ग्राम पंचायतों में फॉगिंग मशीनों की खरीद हो गई है। गांव वालों को भी चाहिए कि वे सफाई के प्रति जागरूक हों।
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- डॉ. शरनजीत कौर, डीपीआरओ
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